क्या नेतन्याहू की विदाई तय हो गई! पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन, अब आगे क्या?

इजरायल में पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसद हैं। जानिए क्या नेतन्याहू की विदाई तय है और राष्ट्रपति हर्जोग अब क्या फैसला करेंगे।

अपडेटेड Nov 06, 2026 पर 11:58 AM
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गाडी आइजनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन तीन समूहों से आया है। इसमें यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के 48 सांसद, रा'म पार्टी के आठ सांसद और अरब नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट के 11 सांसद शामिल हैं।

इजरायल की राजनीति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर बने रहने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पूर्व सेना प्रमुख और याशर पार्टी के नेता गाडी आइजनकोट को राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के साथ चुनाव बाद हुई सलाह-मशविरा प्रक्रिया में 120 सदस्यीय नेसेट के 67 सांसदों का समर्थन मिला है। यह आंकड़ा संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से छह ज्यादा है। दूसरी ओर नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद के लिए 46 सांसदों का समर्थन मिला है। आइजनकोट ने इस समर्थन के बाद इजरायल में 'राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार' बनाने का अपना लक्ष्य दोहराया है। उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता अभी लंबा है लेकिन वह सरकार बनाने के लिए पूरी तरह दृढ़ हैं। हालांकि 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद उनकी सरकार बनना अभी तय नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आइजनकोट को समर्थन देने वाली अरब पार्टियों में शामिल जॉइंट लिस्ट ने साफ कर दिया है कि वह उनकी सरकार में औपचारिक रूप से शामिल नहीं होगी। वह बाहर से समर्थन दे सकती है।

राष्ट्रपति हर्जोग ने भी स्पष्ट किया है कि वह सिर्फ समर्थन के आंकड़ों के आधार पर फैसला नहीं करेंगे। उन्हें यह देखना है कि कौन वास्तव में सरकार बनाने और उसे स्थिर रखने की स्थिति में है। उन्होंने रविवार को किसी एक सांसद को सरकार बनाने का औपचारिक न्योता देने की बात कही है।

आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन कहां से मिला?


गाडी आइजनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन तीन समूहों से आया है। इसमें यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के 48 सांसद, रा'म पार्टी के आठ सांसद और अरब नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट के 11 सांसद शामिल हैं। आइजनकोट के समर्थन का पूरा गणित यहां नीचे दिया गया है-

यहूदी नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन: 48 सीटें। इसमें याशर, टुगेदर, द डेमोक्रेट्स और यिसराइल बेतेनु शामिल हैं।

रा'म पार्टी: 8 सीटें।

जॉइंट लिस्ट: 11 सीटें।

इस तरह कुल समर्थन 67 सांसदों तक पहुंच गया है। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। यानी आइजनकोट को इस प्रक्रिया में बहुमत के आंकड़े से छह ज्यादा सांसदों का समर्थन मिला है। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने भी 5 नवंबर को सभी संसदीय दलों के साथ सलाह-मशविरा पूरा होने के बाद पुष्टि की कि 67 सांसदों ने आइजनकोट को सरकार बनाने का अवसर देने की सिफारिश की जबकि 46 सांसदों ने नेतन्याहू के पक्ष में सिफारिश की।

नेतन्याहू के समर्थन में कितने सांसद?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए इस बार सरकार बनाने की राह मुश्किल होती दिख रही है। चुनाव के बाद उनके नेतृत्व वाले गुट को 53 सीटें मिली थीं लेकिन राष्ट्रपति के सामने हुई सलाह-मशविरा प्रक्रिया में उन्हें सिर्फ 46 सांसदों का समर्थन मिला। नेतन्याहू के पारंपरिक सहयोगी दल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) ने किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देने की सिफारिश नहीं की। इसके बाद नेतन्याहू के समर्थन का आंकड़ा 46 पर रह गया। इससे पहले नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट को 53 सीटें मिली थीं। लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी। UTJ का किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश नहीं करना उनके लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

जॉइंट लिस्ट ने आइजनकोट का समर्थन क्यों किया?

आइजनकोट को 67 सांसदों के समर्थन तक पहुंचाने में अरब नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट की भूमिका अहम रही। जॉइंट लिस्ट ने सर्वसम्मति से आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया। पार्टी ने कहा कि उसका यह फैसला जनता की उस मजबूत मांग के जवाब में लिया गया है जिसके तहत नेतन्याहू और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकना जरूरी माना जा रहा है। जॉइंट लिस्ट के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वे नेतन्याहू और उनके कहे गए सहयोगियों के शासन को जारी रहने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

हालांकि जॉइंट लिस्ट ने इस समर्थन के साथ अपनी राजनीतिक सीमाएं भी स्पष्ट कर दी हैं। पार्टी ने कहा है कि यहूदी विपक्ष के कुछ दलों के राजनीतिक एजेंडे और नीतियों से उसके गहरे मतभेद हैं। इसलिए वह आइजनकोट की सरकार में औपचारिक रूप से शामिल नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर वह बाहर से समर्थन दे सकती है। यही वजह है कि 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद आइजनकोट के लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं माना जा सकता।

क्या 67 सांसदों का समर्थन मिलना सरकार बनने की गारंटी है?

ऐसा नहीं नहीं। राष्ट्रपति के सामने किसी उम्मीदवार को समर्थन देने की सिफारिश करना और उस उम्मीदवार के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए गठबंधन तैयार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है लेकिन इस आंकड़े में जॉइंट लिस्ट के 11 सांसद भी शामिल हैं। जॉइंट लिस्ट ने साफ कहा है कि वह आइजनकोट की सरकार में औपचारिक रूप से शामिल नहीं होगी। वह बाहर से समर्थन देने की संभावना रखती है। इसके अलावा यहूदी विपक्षी दलों के बीच भी अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक असहजता है। ऐसे में आइजनकोट को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास ऐसी व्यवस्था हो जिसके जरिए वह संसद में सरकार का समर्थन बनाए रख सकें।

इसलिए 67 का आंकड़ा आइजनकोट को राष्ट्रपति के सामने मजबूत स्थिति में जरूर रखता है लेकिन इसे सरकार बनाने के लिए तैयार गठबंधन का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। राष्ट्रपति हर्जोग ने भी कहा है कि दोनों पक्षों के बीच आपसी वीटो और मतभेदों की वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सरकार बना पाने की स्थिति में है।

आइजनकोट ने क्या कहा?

67 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद गाडी आइजनकोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह 'चेंज एंड रिपेयर' पार्टियों के साथ पहले दौर की बातचीत और बैठकें हुईं। राष्ट्रपति के आवास पर सलाह-मशविरा प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सरकार बनाने का जनादेश हासिल करने के लिए पूर्ण बहुमत का समर्थन मिला है। आइजनकोट ने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाना है, जो देश को सुरक्षा और सामान्य स्थिति की ओर वापस ले जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का रास्ता अभी लंबा है, लेकिन वे पूरी तरह दृढ़ हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वे यह काम पूरा करेंगे और सफल होंगे। उनके इस बयान से साफ है कि 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद भी वह सरकार गठन की प्रक्रिया को पूरा हुआ नहीं मान रहे हैं।

राष्ट्रपति हर्जोग अब क्या करेंगे?

इजरायल में अगली सरकार बनाने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी निर्वाचित संसदीय दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत पूरी कर ली है। इन बैठकों में दलों ने बताया कि वे किस नेता को सरकार बनाने का अवसर दिए जाने की सिफारिश करते हैं। हर्जोग ने कहा कि उन्हें 67 सांसदों का समर्थन आइजनकोट के पक्ष में और 46 सांसदों का समर्थन नेतन्याहू के पक्ष में मिला है। लेकिन उनके मुताबिक सिर्फ इन आंकड़ों से यह तय नहीं हो जाता कि कौन वास्तव में सरकार बना सकता है। दोनों खेमों के भीतर और उनके बीच मौजूद आपसी वीटो और राजनीतिक मतभेद इस फैसले को जटिल बना रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि वह पार्टी नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत करेंगे ताकि यह समझ सकें कि कौन स्थिर सरकार बना सकता है। उन्होंने रविवार को किसी एक सांसद को सरकार बनाने का औपचारिक न्योता देने की योजना बताई है।

अब आगे क्या होगा?

इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव रविवार है। राष्ट्रपति हर्जोग तब किसी एक सांसद को सरकार बनाने का औपचारिक जनादेश देने की योजना रखते हैं। अगर आइजनकोट को यह जनादेश मिलता है तो उन्हें 67 सांसदों के समर्थन को एक व्यावहारिक संसदीय व्यवस्था और सरकार गठन के समझौते में बदलना होगा। खासतौर पर उन्हें यह तय करना होगा कि जॉइंट लिस्ट के बाहर से मिलने वाले संभावित समर्थन के साथ सरकार कैसे चलेगी और यहूदी विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को किस तरह संभाला जाएगा।

दूसरी ओर, नेतन्याहू को भी सरकार बनाने की संभावना बनाए रखने के लिए अतिरिक्त राजनीतिक समर्थन जुटाना होगा। फिलहाल उनके पक्ष में 46 सांसदों की सिफारिश है, जबकि आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेतन्याहू की विदाई तय हो गई है। आइजनकोट ने समर्थन के आंकड़े में बढ़त जरूर हासिल की है, लेकिन अंतिम फैसला राष्ट्रपति के जनादेश और उसके बाद होने वाली सरकार गठन की बातचीत पर निर्भर करेगा।

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