US-Iran Deal: 'समझौता अब बेहद करीब...', ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा दावा, ट्रंप ने भी दिखाई दिलचस्पी

ईरान का खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल के युद्ध की सबसे बड़ी वजह परमाणु प्रोग्राम ही है। ईरान सालों से अपने परमाणु प्रोग्राम पर काम कर रहा है। वहीं अमेरिका हमेशा इसका विरोध करता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुले मंच से कई बार कह चुके हैं कि वे ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 10:47 PM
US Iran War: मिडिल ईस्ट में बीते तीन महीने से जारी तनाव अब खत्म होता दिख रहा है।

मिडिल ईस्ट में बीते तीन महीने से जारी तनाव अब खत्म होता दिख रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में काफी प्रगति हुई है और दोनों देश किसी समझौते के पहले से कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को लेकर हम पहले कभी इतने करीब नहीं थे।" उन्होंने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का भी जिक्र किया, जहां अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत हुई थी। वहीं इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अब्बास अराग़ची के बयान का स्क्रीनशॉट शेयर किया।

ईरान ने कही ये बात

अरागची ने कहा कि जब तक समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक उसके बारे में किसी तरह की अटकलें लगाने से बचना चाहिए। उनका कहना था कि अधूरी जानकारी के आधार पर चर्चा करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरानी मीडिया में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से जुड़ी कुछ कथित जानकारियां सामने आई हैं। इन खबरों के बाद दोनों देशों के बीच होने वाले समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


 मिडिल ईस्ट में बीते तीन महीने से जारी तनाव अब खत्म होता दिख रहा है।
मिडिल ईस्ट में बीते तीन महीने से जारी तनाव अब खत्म होता दिख रहा है।

इससे पहले ट्रंप का आरोप था कि कुछ रिपोर्टों में प्रस्तावित समझौते की जिन शर्तों का उल्लेख किया गया है, वे वास्तविक वार्ता का हिस्सा नहीं हैं। उनके अनुसार मीडिया में प्रसारित कई जानकारियां वास्तविक दस्तावेजों और बातचीत से मेल नहीं खातीं। यही वजह है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन रिपोर्टों को भ्रामक बताया।

बता दें कि, ईरान का खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल के युद्ध की सबसे बड़ी वजह परमाणु प्रोग्राम ही है। ईरान सालों से अपने परमाणु प्रोग्राम पर काम कर रहा है। वहीं अमेरिका हमेशा इसका विरोध करता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुले मंच से कई बार कह चुके हैं कि वे ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे।

डील में शामिल हैं ये बातें ?

इससे पहले एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था, अमेरिका ईरान में आखिरकार समझौता हो गया है और ये 2 चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें सबसे अहम खबर न्यूक्लियर मटीरियल को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा ईरान के हाइली एनरिच्ड यूरेनियम का डी-एनरिचमेंट ईरान में ही संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों की निगरानी में होगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वादे तभी अमल में लाए जाएंगे जब डील के दूसरे चरण पर अमल होगा। अमेरिका-ईरान समझौते के पहले चरण में 60 दिनों का युद्ध विराम लागू होगा। अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस डील पर हस्ताक्षर करेंगे।

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