वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अंदरूनी कहानी सामने आ रही है। अमेरिका ने इस मिशन को ऑपरेशन एब्सोल्यूट-रिजॉल्व (OAR) नाम दिया था, जिसे बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। इस पूरे मिशन में अमेरिकी सेना, डेल्टा फोर्स, CIA, नेवी और FBI ने मिलकर काम किया। वेनेजुएला पर ट्रंप के इस एक्शन की किसी को दूर-दूर तक भनक नहीं थी। अमेरिकी सेना 5 घंटे में वेनेजुएला पर हमले के बाद स्वदेश वापस लौट आई। हालांकि, इस मिशन की तैयारी कई महीनों से चल रही थी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की कहानी जानना अहम है।
1960 का दशक में तेल उत्पादन ने वेनेजुएला को इतना अमीर देश बना दिया था कि उसे ‘लैटिन अमेरिका का सऊदी अरब’ कहा जाने लगा था। इसी दौर में वेनेजुएला की राजधानी कारकस में निकोलस मादुरो का जन्म हुआ। मादुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को एक साधारण मजदूर परिवार में हुआ था। मादुरो के पिता जीसस निकोलस वर्कर्स के ट्रेड यूनियन के लीडर थे। 1980 के दशक में मादुरो ने क्यूबा जाकर पॉलिटिकल स्टडीज का कोर्स किया।
बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक...
बताया जाता है कि निकोलस मादुरो राजनीति में आने से पहले राजधानी काराकास में एक बस ड्राइवर थे। अपने इसी पेशे के दौरान ही पहली बार उनका राजनीति से परिचय तब हुआ, जब उन्हें बस ड्राइवरों की यूनियन का नेता चुना गया। साल 1992 में जब ह्यूगो शावेज ने असफल तख्तापलट की कोशिश की थी, उस समय मादुरो बस ड्राइवर के तौर पर काम करते थे। बाद में वे शावेज के करीबी समर्थक बन गए। उन्होंने 1998 में पहली बार चुनाव जीतकर संसद में एंट्री की और आगे चलकर नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और विदेश मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे। शावेज ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी चुना था। शावेज की मौत के बाद 2013 में मादुरो बेहद करीबी मुकाबले में चुनाव जीतकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने।
सत्य साईं बाबा को मानते थे गुरु
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि निकोलस मादुरो, सत्य साईं बाबा को अपना गुरु मानते थे। साल 2006 में निकोलस मादुरो ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान वे वेनेजुएला के विदेश मंत्री थे पर वो भारत किसी राजनीतिक यात्रा पर नहीं, लेकिन अपने गुरु का आशीर्वाद लेने। निकोलस मादुरो, सत्य साईं बाबा के दर्शन के लिए आए थे। 2006 में वो आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में 'प्रशांति निलयम आश्रम' दर्शन के लिए आए थे।
विवादों में रहा 2025 का चुनाव
वेनेजुएला में उनके शासन के दौरान देश को भारी महंगाई, जरूरी चीजों की कमी और गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। इस दौर में चुनावों में गड़बड़ी और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लगे। उनकी सरकार पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगाए। साल 2020 में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया। जनवरी 2025 में उन्होंने तीसरा कार्यकाल शुरू किया, लेकिन यह चुनाव भी विवादों में रहा और कई लोगों ने इसे धोखाधड़ी वाला बताया। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी बलों ने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए। वहीं विपक्ष की प्रमुख नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जिससे मादुरो सरकार की सख्त और दमनकारी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान और बढ़ गया।