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संसाधनों पर पहला हक गरीबों का: नरेंद्र मोदी

प्रकाशित Sat, 19, 2014 पर 14:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश के सबसे बड़े बिजनेस चैनल सीएनबीसी आवाज़ पर बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने खुलकर अपने दिल की बात की है। चुनाव के सबसे बड़े इंटरव्यू में उन्होंने विकास, चुनौतियों, आरोपों, प्रत्यारोपों पर बेबाक राय रखी है। आवाज़ संपादक संजय पुगलिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की जनता की अपेक्षाएं उनसे बहुत ज्यादा है और वो इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटने वाले हैं।


सीएनबीसी आवाज़ के संपादक संजय पुगलिया के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी एनडीए सरकार लोगों के भले के लिए काम करेगी और भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करेगी। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने देश के आर्थिक विकास का रोडमैप सामने रखा।


आइये देखते हैं कि आवाज़ संपादक संजय पुगलिया के सवालों का जवाब नरेंद्र मोदी ने किस तरह दिया है।


संजय पुगलियाः आपने देश की जनता से कहा है कि जो काम 60 साल में नहीं हुआ वो आप 60 महीनों में कर सकते हैं, क्या आप को नहीं लगता है कि आपने बहुत बड़े-बड़े कमिटमेंट कर दिए हैं और इन कामों को करने के लिए आपके सामने बहुत बड़ी चुनौती होगी?


नरेंद्र मोदी: देश की जनता की अपेक्षाएं बहुत हैं, मैं इससे सहमत हूं। अपेक्षाओं का मूल कारण ये है कि देश के सामान्य नागरिकों के सपने चूर चूर हो गए हैं। इन दिनों मैं सारे देश में भ्रमण करता हूं और मैं पहले भी करता था। शायद हिंदुस्तान के इतिहास में मैं अकेला राजनीतिज्ञ हूं जिसे देश के 400 जिलों में जाने और बातचीत करने का सौभाग्य मिला है। हालांकि पिछले 12-15 सालों में मैं गुजरात की राजनीति में उलझा हुआ था। अब जब मैं दोबारा उन जिलों में गया हूं तो कोई ऐसा जिला नहीं है जिसने मुझे पीने के पानी की समस्या को लेकर शिकायत नहीं की हो। इस बात से मैं काफी परेशान हुआ कि क्या आजादी के बाद हम लोगों को पीने का पानी नहीं दे पाए हैं। ये बातें हैं जिसने लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ा दीं हैं और मैं मानता हूं कि जनता का दबाव बना रहना चाहिए। देश में अच्छा करने, अच्छा पाने के लिए जनता का दबाव बना रहना चाहिए। इसी के बाद बाकी सब नेता और सरकारें जनता की भलाई करने का कदम उठाएंगे।


संजय पुगलियाः देश की स्थिति इस वक्त बहुत खराब है आपको लगातार काम करना होगा, आपकी टीम या कैबिनेट बनाने का आधार क्या होगा, खासकर आर्थिक मोर्चे पर काफी काम करना होगा, वहीं गठबंधन की राजनीति में कुछ काम दबाव के चलते नहीं हो पाते हैं तो आपकी सरकार का आधार क्या होगा और देश की आर्थिक स्थिति के लिए आपकी क्या योजना है?


नरेंद्र मोदी: संजय बारू की किताब मैनें पूरी नहीं पढ़ी है लेकिन जितनी भी पढ़ी है उसके आधार पर यही लगता है कि प्रधानमंत्री को छोटे-छोटे दलों की बजाए एक परिवार का दबाव बहुत था। दूसरी बात है कि गठबंधन की सरकार हो या ना हो, या पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो, सरकार को क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझना ही होगा। देश की सरकार को एक जगह से चलाने की जो प्रवृति है उसे बदलना होगा। प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो एक समय में कांग्रेस की केंद्र और राज्यों दोनों जगह सरकारें होती थी। लेकिन बाद में समय बदला और राज्यों में अलग पार्टियों की सरकारें आईं जिसे कांग्रेस ने ठीक नहीं समझा। इसके कारण राज्यों में माहौल बिगड़ गया। केंद्र में बैठने वाली सरकार की सोच होनी चाहिए-टीम इंडिया। पहली बार देश की राजनीति के केंद्र में ऐसा व्यक्ति आया है जिसे राज्य चलाने का लंबा अनुभव है और केंद्र से उसे क्या दिक्कतें होती हैं, राज्यों की क्या समस्याएं हैं उसे वो समझता है। टीम इंडिया का मतलब है राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री। इस टीम के काम करने के बाद आप देखिए देश कितनी जल्दी बदलना शुरू हो जाएगा।


संजय पुगलियाः ये एक बहुत नया सुझाव है और बहुत इस पर चर्चा कर रहे हैं कि ये कैसे होगा? क्या आप एक पॉलिटिकल बॉडी बनाएंगे जो इस टीम इंडिया का हिस्सा होगी? क्या इसके फैसले केंद्रीय मंत्रिमंडल लागू करेगा? क्या आप इसको एक राजनीतिक परामर्श दल बनाएंगे?


नरेंद्र मोदी: आजकल देश में संवाद और संचार ही नहीं हो रहा है, शासन में चिट्ठी-पत्री के जरिए काम हो रहा है। जो टीम इंडिया का मॉडल हम सोच रहे हैं ये एक पारिवारिक माहौल होगा जिसमें सब मिलकर अपने अपने सुझाव रखेंगे। सभी राज्य और केंद्र मिलकर हम एक परिवार हैं। केंद्र कोई आदेश दे दे और राज्य इसे मानें, सत्ता का केवल एक केंद्र बन जाए, इस तरह की संस्कृति अब नहीं चलेगी।


संजय पुगलियाः क्या आप गठबंधन की राजनीति के दबाव में आकर महत्वपूर्ण मंत्रालय जैसे आर्थिक मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय के ऊपर कोई समझौता करेंगे?


नरेंद्र मोदीः कौन सा मंत्रालय किस पार्टी के पास जाएगा, इस के विषय में अभी चर्चा करना बहुत जल्दबाजी होगी। अभी मंत्रालयों पर चर्चा करना ठीक नहीं। भाजपा के मेनिफेस्टो के मुताबिक क्या सोचा गया है, इसे जानना चाहिए। भारत के विकास में रेलवे विभाग बहुत महत्वपूर्ण पहलू है, हमने रेलवे को केवल पैसेंजर सेवा का माध्यम मान लिया है। हमें रेलवे को देश का ग्रोथ इंजन बनाना होगा। रेलवे की ऐसी व्यवस्था है जो राज्य और केंद्र के विकास को जोड़ने का बड़ा माध्यम बन सकता है। इस विभाग पर कई पार्टियों के दबाव रहते हैं। रेलवे में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। रेलवे को टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। अगर हम सुपर कंप्यूटर की मदद से रेलवे के नेटवर्क का इस्तेमाल कर पाएं तो हम विश्व को बहुत बड़ी ताकत दे सकते हैं।


संजय पुगलियाः इसी पर लोगों को संदेह है कि क्या बीजेपी के पास इस तरह के काम करने के लिए पर्याप्त अनुभवी लोगों की टीम है, बीजेपी को इस तरह के काम करने के लिए बाहर से भी लोग लेने होंगें?


नरेंद्र मोदीः भाजपा की जहां भी सरकार हैं वहां सर्वश्रेष्ठ काम किया गया है, एनडीए की सरकार ने शानदार काम किया है। वास्तव में काम करने का कमिटमेंट होना चाहिए, लोगों में काम करने की इच्छा होनी चाहिए, नया काम सीखना मुश्किल नहीं है।


संजय पुगलियाः  तो क्या आप प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए नए विभाग बनाएंगे और नए लोगों को सरकार में लाएंगे? नए मंत्रियों और नए विभाग की जरूरत पड़ेगी?


नरेंद्र मोदीः सरकार को वनडे की तर्ज पर काम करना होगा, गुजरात में हमने सिंगल विंडो क्लियरेंस के आधार पर काम किया है। गुजरात में वनडे गवर्नेंस मॉडल का प्रयोग किया है, टेक्नोलॉजी से तैयार 225 सेंटर बनाए गए हैं जहां कोई भी व्यक्ति सुबह अपना काम लेकर आता है और शाम को उसका काम हो जाता है।


संजय पुगलियाः तुरंत सरकार बनने के बाद आप रुके हुए प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देंगे, क्या बैंकों के एनपीए सुधारने का काम करेंगे, क्या नाकाबिल प्रमोटरों को बाहर करेंगे, फ्यूल लिंकेज के लिए कोल इंडिया के काम करने का तरीक बदल पाएंगे? क्या इस लिटमस टेस्ट को आपकी सरकार पास कर पाएगी?


नरेंद्र मोदीः देश के लिए जो काम करना होगा, उसमें कोई राजनीतिक दबाव बीच में नहीं आएगा और यही मेरी पहचान है। कोल इंडिया को क्या हम प्रोफेशनलाइज नहीं कर सकते हैं? आराम से कर सकते हैं। जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री बनकर आया तो गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड भारी घाटे में चल रहा था, लेकिन मैंनें इस तरह का प्रोफेशनल मैनेजमेंट बनाया और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन किया कि आज वो मुनाफे में है और 24 घंटे बिजली देता है। कंपनी की एफिशिएंसी भी बढ़ गई है। कोल इंडिया के मामले में भी ऐसा हो सकता है और मुझे इन मामलों का अच्छा अनुभव है।


संजय पुगलियाः भारत की राजनीति में क्रोनिलिज्म का शब्द सुनते हैं, यही सबसे बड़ा क्रोनिलिज्म पीएसयू कंपनियों के मामले में सुनते हैं, तो क्या आप कुछ बड़े संस्थानों का प्राइवेटाइजेशन करेंगे या नहीं?


नरेंद्र मोदीः इस तरह के फैसले भी राजनीतिक नहीं होने चाहिए बल्कि प्रोफेशनल होने चाहिए। इसके लिए प्रोफेशनल राय लेनी चाहिए। आज भी जो डूबे हुए पीएसयू हैं, अगर उनके कर्मचारियों को विश्वास में लेकर उन्हें ताकत दी जाए तो वो प्राइवेट संस्थानों से बेहतर काम करके दिखा सकते हैं। पीएसयू के कर्मचारियों की योग्यता पर संदेह नहीं करना चाहिए और उन पर भरोसा करना चाहिए।


संजय पुगलियाः आपके मेनिफेस्टो में एफडीआई रिटेल पर दोबारा विचार करने की बात करना और जीएसटी के लिए कोई तय तारीख नहीं देना सवाल पैदा करता है। इसके लिए भाजपा में विरोध रहा है इस बारे में आप क्या कहेंगे?


नरेंद्र मोदीः भाजपा हमेसा जीएसटी के पक्ष में रही है। जब प्रणव मुखर्जी वित्त मंत्री थे तो जीएसटी पर मेरी उनसे चर्चा हुई है।  जीएसटी की सफलता का आधार, संसद में इसपर क्या कानून लाते हैं इस पर निर्भर नहीं है। जीएसटी की सफलता आईटी नेटवर्क को मजबूत बनाने पर निर्भर करती है। जब तक आईटी नेटवर्क को सुदृढ़ नहीं बनाया जाएगा, जीएसटी कारगर नहीं होगा। भारत सरकार अब तक ऐसा नहीं कर पाई है। इसके अलावा भारत सरकार को जीएसटी के मुददे पर राज्यों को विश्वास में लेना होगा जो अभी तक नहीं हुआ है। राज्यों को जीएसटी से नुकसान नहीं होना चाहिए। राज्यों को नुकसान पहुंचाकर कोई भी कानून लाना फायदा नहीं करेगा। जीएसटी की जरूरत है हम ये मानते हैं लेकिन इसकी प्रकिया के बारे में चर्चा होनी चाहिए।


संजय पुगलियाः आपकी सरकार का पहले 100 दिन का एजेंडा क्या होगा?


नरेंद्र मोदीः ये शॉर्टकट वाली राजनीति का हिस्सा है और मीडिया ट्रेडर इस तरह की बात करते हैं। सरकार चलाना एक गंभीर काम है और इसी गंभारता से करना चाहिए। सरकार को मीडिया पब्लिसिटी वाले फैसले नहीं लेने चाहिए। सरकार की काम की समीक्षा 5 साल में होनी चाहिए। 100 दिन, 1 महीना, 1 साल के आधार पर सरकार के काम का हिसाब किताब नहीं करना चाहिए। ये बहुत बड़ा देश है और यहां काम करने में वक्त लगता है।


संजय पुगलियाः क्या पीएमओ का स्वरूप बदलेगा और इसे और मजबूत बनाया जाएगा या कैबिनेट की स्थित और मजबूत होगी?


नरेंद्र मोदीः भारत जैसे देश में केवल एक ऑफिस के बल पर काम नहीं किए जा सकते हैं। काम करने के लिए सत्ता का केवल एक केंद्र नहीं होना चाहिए और सबको मिलजुलकर काम करना चाहिए। जिम्मेदारियां बांटने से ही काम की गति बढ़ेगी। मेरे 14 साल के गुजरात के शासनकाल में मुझे कभी सेक्रेटरी को फोन करने की जरूरत नहीं पड़ी है। राज्य में सिस्टम है, विभाग हैं, मंत्री है और अधिकारी हैं जो अपना काम अपने आप कर लेते हैं।


संजय पुगलियाः पार्टी में बुजुर्ग लोग मार्गदर्शन करें ये तो ठीक हैं लेकिन सरकार में काम करने के लिए बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं की जरूरत है, आप क्या सोचते हैं?


नरेंद्र मोदीः देश के बुजर्ग लोग बेकार नहीं हैं और देश को चलाने के लिए अनुभव और ऊर्जा दोनों की जरूरत होती है। इन बातों को इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। देश समाज की सबकी शक्तियों के जरिए चलता है। कहीं अनुभव लगता है और कहीं शक्ति लगती है।


संजय पुगलियाः क्या हम ये माने कि आप ज्यादा से ज्यादा पैसे राज्यों के हाथ में देंगे और राज्यों को ज्यादा मजबूत बनाएंगे?


नरेंद्र मोदीः सरकार राज्यों को विश्वास में लेगी तभी अच्छी तरह काम होगा, देश में अभी भी 4 फीसदी से ज्यादा कृषि ग्रोथ नहीं है, तो क्या भारत सरकार कृषि करने जा सकती है। जो राज्य जिस क्षेत्र में अच्छे हैं उन्हें उस क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। राज्यों को पैसे देने में लचीलापन जरूरी है, राज्य के पास अगर सड़क अच्छी है और उसको पानी के लिए पूंजी चाहिए तो ये प्रावधान होना चाहिए कि उन्हें एक मद का पैसा दूसरे के लिए दिया जा सके। राज्य की खूबी देखकर उन्हें मदद मिलनी चाहिए।


संजय पुगलियाः अमेरिका के साथ भारत के संबंध अच्छे नहीं हैं, आप इसको किस तरह सुधार पाएंगें?


नरेंद्र मोदीः ग्लोबलाइजेशन के बाद विश्व के हालात बदल चुके हैं, कूटनीति के मायने बदल चुके हैं। आज मुख्य रूप से व्यापार, वाणिज्य और तकनीकी सपोर्ट के आसपास वैश्विक संबंध ज्यादातर बन रहे हैं। भारत के विषय में भी जो सबसे अच्छा होगा उसके लिए विश्व के अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित किए जाएंगे।


संजय पुगलियाः सब्सिडी को जारी रखने का मुद्दा चुनाव जीतने के लिए तो ठीक है, आपने भी फूड सिक्योरिटी की बात कही है, गरीबों के नाम पर भारी-भरकम खर्च करना ठीक है लेकिन क्या इस पैसे को देश के विकास में नहीं लगाना चाहिए?


नरेंद्र मोदीः देश के संसाधनों पर पहला हक गरीबों का है, हिंदुस्तान की तिजोरी पर गरीबों का हक है और हमेशा रहेगा। भाजपा की सोच ये है कि गरीबों और देश को गरीबी से बाहर निकाला जाए। सरकार की एप्रोच गरीब को गरीब रखने पर नहीं बल्कि सशक्त बनाने पर होगी। सरकार की नीतियां प्रो-पीपुल रहेंगी।


संजय पुगलियाः आपने मु्स्लिमों को अपनी तरफ रखने के लिए कई बयान दिए हैं, क्या आप चुनावों के इस दौर में मुस्लिमों को अपने साथ में रखने में कामयाब हो पाएंगे?


नरेंद्र मोदीः मैनें कभी जात-पात, धर्म-पंथ की राजनीति नहीं की है और आगे भी कभी नहीं करूंगा। पहले भी मैनें गुजरात में 6 करोड़ गुजराती के एक ही मंत्र पर काम किया है और अब 125 करोड़ भारतीयों के लिए मंत्र है। देश हिंदू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई के नाम पर राजनीति से तंग आ चुका है। अब देश में ऐसा नहीं चलेगा। अब युवा, किसान, गरीब, नौजवान, आरोग्य, शिक्षा, गरीब, गांव, शहर इसी तरह की बातों पर देश चलना चाहिए।


संजय पुगलियाः सोनिया गांधी अगर बुखारी से मिलती है तो उसे आपकी पार्टी राजनीति कहती है लेकिन राजनाथ सिंह कल्बे जव्वाद से मिले तो उसे सही ठहराती है, इस पर क्या कहना है?


नरेंद्र मोदीः हमने कभी किसी के मिलने पर आपत्ति नहीं उठाई। लेकिन उन्होंने कहा कि किसी खास धर्म को मिलकर किसी एक पार्टी के खिलाफ वोट करनी चाहिए इस पर भाजपा को आपत्ति है। लोकतंत्र में मिलना-जुलना जिम्मेवारी का हिस्सा है, इस पर कोई आपत्ति नहीं है। आप किस तरह का संदेश दे रहे हैं, ये महत्वपूर्ण है।


संजय पुगलियाः आप बनारस के मुस्लिम मतदाताओं से क्या कहेंगे?


नरेंद्र मोदीः मैं कभी भी किसी एक धर्म के नाम पर राजनीति करने का पाप नहीं करूंगा। मैं तोड़ने वाली राजनीति का शिकार नहीं होना चाहता, मुझे हार मंजूर है लेकिन वोट बैंक की राजनीति करना नहीं। मैं किसी भी जाति विशेष के लिए कुछ नहीं कहूंगा, जो कहूंगा देश के 125 करोड़ भारतीयों से कहूंगा। मुझे गुजरात में इसी आधार पर सफलता मिली है और भरोसा है कि देश में भी सफलता मिलेगी। मैं, हम सब एक हैं का मंत्र लेकर चलूंगा। हम सब देशवासी एक हैं और मैं कभी सेक्युलरिज्म की राजनीति नहीं करूंगा। सिर्फ अच्छा काम करने में मन लगा रहना चाहिए।


संजय पुगलियाः पहली बार मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए तैयार बैठा है, ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में इस तरह की सोच नहीं होनी चाहिए लेकिन इस सच्चाई पर आपका क्या कहना है?


नरेंद्र मोदीः जो लोग इस तरह की राजनीति करते हैं वो करते रहें, मैं जिस लाइन पर काम करता हूं उस पर करता रहूंगा।


संजय पुगलियाः इस वक्त बीजेपी की शीर्ष लीडरशिप में आप, राजनाथ सिंह और मोहन भागवत केंद्र में हैं, इस वक्तव्य पर आपका क्या कहना है?


नरेंद्र मोदीः जब जब कांग्रेस के बुरे दिन आते हैं वो इस तरह की बयानबाजी करती है और आरएसएस को गाली देने के लिए मैदान में उतर आती है। आरएसएस एक सांस्कृतिक, देश के लिए समर्पित संगठन है। विदेशी प्रभाव में रहने वाली न्यूज ट्रेडर्स ने आरएसएस के खिलाफ दुष्प्रचार किया है और आरएसएस का बहुत नुकसान किया है। आरएसएस देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाला संगठन है। आरएसएस के लोग अपना घरबार छोड़कर देश के उत्तरी-पूर्वी, दक्षिणी राज्यों में जाकर काम करते हैं। इस संगठन को सम्मान देना चाहिए। आरएसएस एक गैर सरकारी संगठन है जो देश के लिए अच्छा काम कर रहा है।


संजय पुगलियाः आपके बारे में कहा जा सकता है कि आप बीजेपी को आरएसएस के पास ले गए हैं, हाल ही में मैनें आरएसएस के एक नेता का इंटरव्यू किया जिन्होंने कहा कि 1977 के बाद आरएसएस पहली बार चुनावों में अभूतपूर्व ढंग से सक्रिय है। इस पर आप क्या कहेंगे?


नरेंद्र मोदीः आरएसएस के साथ चुनावों को लेकर कभी चर्चा नहीं हुई है। चुनाव को लेकर संघ से कभी कोई निर्देश नहीं आते हैं। हालांकि मैं आरएसएस से जुड़ा रहा हूं। मेरे जीवन पर आरआसएस का बहुत प्रभाव है। जीवन में संस्कार, स्वभाव, अनुशासन मेहनत करने की सीख आरएसएस से मिली है।


संजय पुगलियाः मीडिया को आप न्यूज ट्रेडर कहते हैं, इससे आपका क्या मतलब है और इसको आप कैसे समझाएंगे?


नरेंद्र मोदीः मैनें मीडिया पर कभी भी किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है। जिस तरह से कोर्ट के संबंध में कुछ भी बोलो तो कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट होता है लेकिन मीडिया में किसी नेता को कुछ भी गलत कहा जाता है और अगर उसके खिलाफ कुछ कहा जाए तो बहुत बड़ा बवाल हो जाता है। ये एक तरह का आतंकवाद चल रहा है जिसपर रोकथाम होनी चाहिए। हम राजनीति में है जिसे इसे भुगतना पड़ता है।


संजय पुगलियाः जितनी मीडिया स्क्रूटनी आपकी हुई है उतनी किसी भी नेता की नहीं हुई है और इसीलिए आपने एक ऐसी व्यवस्था बना ली है जिससे आपको मीडिया की जरूरत नहीं है। इस पर आपको क्या कहना है?


नरेंद्र मोदीः मैं मानता हूं कि मीडिया लोकतत्रं की बहुत बड़ी ताकत है और मीडिया की ताकत बढ़नी चाहिए। राजनीति ने मीडिया की इस धरोहर को बहुत नुकसान पहुंचाई है। जिस तरह राजनीति को सुधारने का काम राजनीतिज्ञों का है उसी तरह मीडिया को सुधारने का काम भी मीडिया वाले लोग ही कर सकते हैं। मीडिया की क्रेडिबिलिटी कैसे बढ़े, मीडिया को खुद इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।


संजय पुगलियाः राजनीति के अपराधीकरण पर आपका क्या कहना है, आपने कहा कि 1 साल के भीतर दागी राजनीतिज्ञों के खिलाफ मामले तय हो जाने चाहिएं और सिस्टम की सफाई हो जानी चाहिए। अगर आप सत्ता में आ जाते हैं तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे काम करेंगे और आपकी क्या नीति होगी?


नरेंद्र मोदीः इसके लिए मैं कुछ विस्तार में जाना चांहूंगा। राजनीति का अपराधीकरण बहुत गलत है और इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए। आजादी के बाद संघर्ष के साथ तपे-तपाए समझदार नेताओं का राजनीति में प्रवेश हुआ। 15-20 साल में बदलाव आया और गुटबाजी से उभरकर आई हुई राजनीति हावी होने लगी। इसको कम करने के लिए जातिगत राजनीति शुरू हो गई, खेमे बनने लगे, जिससे देश की नेतृत्व क्षमता पर असर पड़ने लगा, देश के राजनीतिक ढ़ांचे पर नकारात्मक असर पड़ा। नेताओं ने असामाजिक तत्वों का सहारा लेना शुरु कर दिया, जिसके बाद जातियों के दंबंग लोगों ने सोचा कि वो नेताओं की मदद क्यों करें और खुद ही नेता क्यों ना बन जाएं। धीरे धीरे बंदूक की नोक से नेता निकलने लगे। ये अपराधीकरण होता गया और इससे देश का बहुत नुकसान हुआ है। ये देश के लिए चिंता का विषय है। राजनीतिक पार्टियां चाहकर भी 100 फीसदी शुद्धिकरण नहीं कर पा रही हैं। इसके लिए मैनें एक उपाय सोचा है कि इस बार जो संसद बनेगी, उसमें जो भी नेता चुनकर आएंगे, उनकी नॉमिनेशन सूचना के आधार पर देखा जाएगा कि उनके खिलाफ कितने अपराध के केस हैं, इनकी सूची बनाकर सुप्रीम कोर्ट को दे दी जाएगी। अदालत से कहा जाएगा कि एक मैकेनिज्म बनाया जाए, नेताओं पर कितने केस दर्ज हैं इसकी जांच से पता चल जाए कि अगर वो अपराधी है तो जेल चला जाएगा। जेल जाने पर ससंद में उसकी सीट खाली हो जाएगी और उप चुनाव हो जाएंगे। इसके बाद एमएलए की बारी आएगी, उनकी स्क्रूटनी हो जाने पर न्याय की प्रकिया पूरी हो पाएगी। एक बार अगर हमने ससंद, विधानसभा से दागी नेताओं को निकाल बाहर किया तो राजनीति में काफी स्वच्छता आ जाएगी। इसके बाद कॉर्पोरेशन स्तर पर, पंचायत स्तर पर इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती हो जाएगी और मेरा सपना है कि उन्हें 100 फीसदी अपराध मुक्त राजनीति का उपहार दिया जाएगा। मैं मानता हूं कि ऐसा करके हम गांधीजी को बहुत बड़ी श्रद्धांजलि देंगे। ऐसा हो सकता है और इसके लिए मैं मीडिया, देश की जनता सभी के सुझाव ले सकता हूं।


संजय पुगलियाः आप पर बदले की राजनीति करने का आरोप ना लग जाए क्या इस डर से आप जमीनों के मुद्दे, भ्रष्टाचार से जुड़े मसलों की जांच नहीं करेंगे?


नरेंद्र मोदीः हमारे देश में भ्रष्टाचार के बाद क्या होता है इस पर बहुत चर्चा होती है, और अंत में इसका कोई लाभ नहीं निकलता है। मेरा सोचना है कि देश में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि भ्रष्टाचार को पनपने का मौका ही ना मिले। मेरा ऐसा मानना है कि देश में पुराने भ्रष्टाचार को खत्म करने से ज्यादा नए भ्रष्टाचार को रोकने पर शक्ति केंद्रित करनी चाहिए। अगर मैं तकनीक की मदद से पारदर्शी व्यवस्था बना देता हूं जो नीतिपरक हो तो देश में भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेकने में समस्या नहीं आएगी। इसके बाद भ्रष्टाचार की पुरानी बीमारी को कैसे खत्म किया जाए इस पर भी काम किया जाएगा। नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमंत्री बन जाते हैं और उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार के आरोप आएं तो उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए।


संजय पुगलिया: जितनी संस्थाएं, जितनी परिस्थितियां है उनकी एक गंभीर मरम्म्त करना आपके लिए पहला टास्क होगा। सीबीआई से लेकर सीवीसी, चुनाव आयोग से लेकर पार्लियामेंट की कार्य पद्धति को रिस्टोर करना क्या एक बड़ी चुनौती नहीं है आपके लिए?     


नरेंद्र मोदी: मूलत: संवैधानिक संस्थाएं बुरी नहीं है, भारत के संवैधानिक निर्माताओं ने जो इंस्टिट्यूशनल फ्रेम वर्क हमें दिया है, वो अपने आप में बुरा नहीं है। लेकिन लीडरशीप नहीं मिलने के कारण, पार्टी एंड पावर के लोगों की वरीयता अलग होने के कारण इन सबको छोटा-मोटा नुकसान हुआ है। अगर एक बार सही दिशा में जाना है यह तय हो जाए, तो यही संस्थाएं, यही लोग अपनी राह बदलकर अच्छाई की ओर चल पड़ेंगे ।  


संजय पुगलिया: एक सवाल जो बिजनेस और राजनीतिज्ञों के संबधों से जुड़ा हुआ है। आप के बारे में तरह-तरह की चर्चाएं, आलोचनाएं चल रही हैं, कॉग्रेस पार्टी का नया टैग जिसमें टॉफी मॉडल पर बात हो रही है, मुद्दा यह है कि आपकी एक इमेज है बिजनेस फ्रेंडली की, मुझे लगता है अच्छी इमेज है लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि आप कॉर्पोरेट के लिए कुछ भी कर देते हैं। मेरा सवाल यह है कि क्या कोई भी कॉर्पोरेट आपको इस्तेमाल कर सकता है? ये देश के हर क्रोनी कैपिटलिस्ट को पता है, ये बात आप कह दीजिए?


नरेंद्र मोदी: हिंदुस्तान के नेताओं में हिम्मत नहीं है कि खुले में उद्योगपतियों के बीच खड़े रहकर फोटो निकालें, क्योंकि उनके अंदर चोरी और पाप है। परदे के पीछे ये दिन रात उद्योगपतियों के साथ ही बैठे रहते हैं। मेरे पास पूरी जानकारी है मैं खुलकर के बैठता हूं, क्योंकि मुझे कुछ छुपाना नहीं है, मुझे कुछ चोरी नहीं करनी है इसलिए जनता के सामने नाटक करने की जरूरत नहीं है। आप जैसे है वैसे दुनिया देखें इसी में आपकी ताकत है। मैं चाहूंगा कि आप मेरा ये जबाव बार-बार आप अपने दर्शकों को दिखाएं, ताकि सच सबके सामने आएं। मैं मानता हूं कि नौजवानों को अगर रोजगार देना है तो हमे औद्योगिक विकास करना होगा, तो ये मैं करता हूं। उसमें भी आधा मीडियम एंड स्मॉलस्केल इंडस्ट्री के लिए, इतना ही नहीं भारत सरकार की रिपोर्ट कहता है हिंदुस्तान में मध्यम और छोटे इंडस्ट्रीज का ग्रोथ लगभग 20 फीसदी है। गुजरात का मध्यम और छोटे इंडस्ट्रीज का ग्रोथ 85 फीसदी है। ये बड़े लोग नहीं हैं, सिर्फ 5-10 लाख रुपये की पूंजी से काम करने वाले नई पीढ़ी के लोग है। मैं हर साल 13-14-15 जून को 44 डिग्री तापमान में मेरी पूरी सरकार को लेकर गुजरात के गांव में जाता हूं। मेरी सरकार का कोई अफसर इन दिनों कहीं घूमने-फिरने नहीं जाता। मिनिस्टर, एमपी, एमएलए, आईएस अफसर, आईपीएस अफसर, डिस्ट्रिक्ट अफसर कोई भी हो हम सब उस गांव में हर घर जाते है जहां पढ़ाई की कमी है और वहां बच्चों को स्कूल में दाखिल करने को कहते हैं। इसका परिणाम यह आया है कि आज मेरे यहां 100 फीसदी एनरोलमैंट है। ये काम करने का मुझे आनंद आता है। हर साल मई से लेकर जून तक अक्षय तृतीया से 1 महीने तक मेरे राज्य में कृषि महोत्सव होता है उसमें हम 225 कृषि रथ बनाते हैं। मेरे हाथ में जितने भी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी है उसमें 1000 संशोधक है। हम गांव में जाकर किसानों के साथ बैठकर एग्रीकल्चर में क्या बदलाव आया है उसकी जानकारी देते हैं। अच्छे बीज कौन से हैं फसल कौन सी लेनी चाहिए, खाद का कितना ऊपयोग करना जैसी छोटी से छोटी बातें बताते है। इस तरह हम किसानों के लिए लगातार कड़ी मेहनत करते हैं। मेरे इंडस्ट्री के साथ ईमानदारी के संबध है। देश में एमएसएमई ग्रोथ 20 फीसदी, गुजरात में 85 फीसदी ग्रोथ इसी से पता लग जाता है कि मैं सही हूं।


संजय पुगलिया: अगर आप प्रधानमंत्री बन गए तो उसके बाद पीएमओ कैम्प लगा करेंगे गुवाहाटी, गोद्दा, केरल, राजस्थान या कहीं उड़ीसा में जैसे आप करते आ रहे हैं। तो क्या पीएमओ को भी इन स्थानों के लिए बाहर काम करना पड़ेगा?


नरेंद्र मोदी: आज देश में विदेश के डेलिगेट्स आते हैं। प्रधानमंत्री के साथ साल में 5-6 हाईपावर डेलिगेशन की मीटिंग होती है, वो सारी दिल्ली में होती है। एक तरफ हम टूरिज्म का ब्रांडिंग करना चाहते हैं। मान लीजिए कल ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मिलने आते है और मैं बनारस में मीटिंग रखता हूं तो बनारस की ब्रांडिंग होगी। इस तरह हमारा फोकस छोटे शहरों की ब्रांडिंग पर बढ़ेगा और देश का पर्यटन उद्योग फलेगा फूलेगा।


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