बिहार के कई जिलों, खासकर सीतामढ़ी में आम और लीची की खेती हजारों किसानों की जीविका का प्रमुख आधार है। ये फल न केवल स्थानीय बाजारों बल्कि देश-विदेश में भी अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन हर साल जैसे ही इन फसलों में बौर आता है, कीटों का प्रकोप शुरू हो जाता है, जिससे न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, जिससे किसानों के लिए नई चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में पारंपरिक उपायों के बजाय अब वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की तलाश की जा रही है।
