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केले की फसल पर मंडरा रहा पनामा रोग का खतरा, फंगस से बचाव के लिए करें ये उपाय

Panama Disease: यह फंगस केले के पौधे की जड़ों से प्रवेश करता है और उसके संवहनी तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे पानी और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसका नतीजा ये होता है कि, पौधा धीरे-धीरे मुरझा जाता है और अंततः मर जाता है

Edited By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 19, 2025 पर 8:50 PM
केले की फसल पर मंडरा रहा पनामा रोग का खतरा, फंगस से बचाव के लिए करें ये उपाय
गर्मी के मौसम में उच्च तापमान से केले की फसल पर पनामा रोग का खतरा मंडरा रहा है

Banana Panama Disease: गर्मी के मौसम में उच्च तापमान से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उच्च तापमान का असर खेतों और फसलों पर भी देखने को मिल रहा है। खेतों में मिट्टी की नमी प्रभावित हो रही है। इस मौसम में केले की फसल को लेकर किसानों की चिंता और भी बढ़ती जा रही है. अप्रैल-मई की तपन के बीच केले की फसल में पनामा रोग तेजी से फैल रहा है. आइए आपको बताते हैं क्या है पनामा रोग और कैसे इससे फसल को बचाया जा सकता है।

क्या है पनामा रोग?

पनामा रोग, जिसे फ्यूजेरियम विल्ट भी कहा जाता है, केले के पौधों को प्रभावित करने वाली एक विनाशकारी बीमारी है। यह मिट्टी जनित कवक फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम एफ. एसपी. क्यूबेंस के कारण होती है। यह फंगस केले के पौधे की जड़ों के माध्यम से प्रवेश करता है और उसके संवहनी तंत्र (vascular system) को प्रभावित करता है, जिससे पानी और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसका नतीजा ये होता है कि, पौधा धीरे-धीरे मुरझा जाता है और अंततः मर जाता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के मौसम में यह रोग अधिक सक्रिय हो जाता है और तेजी से फैलता है. इसकी वजह से न केवल उत्पादन में कमी होती है बल्कि फसल की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता है.

कृषि विशेषज्ञों की सलाह: समय रहते करें बचाव

डॉ. बीरेंद्र अनंत, सहायक संचालक, कृषि विभाग ने बताया कि पनामा रोग से बचाव के लिए किसानों को निरंतर निगरानी और जैविक रसायनों का प्रयोग करना चाहिए. मिट्टी की नियमित जांच और संतुलित सिंचाई फसल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है. पनामा रोग से बचाव के लिए रासायनिक छिड़काव और जैविक उपचार का संतुलित उपयोग जरूरी है.

ये है प्रभावी उपाय:

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