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बिहार का शहद अब विदेशों में बिकेगा हाथोंहाथ, जानें पूरी कहानी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नई पहल कर रहा है। हाल ही में आईसीआईसीआई फाउंडेशन से ₹56.64 लाख का अनुदान मिला। इसके तहत अत्याधुनिक शहद प्रसंस्करण और पैकिंग यूनिट स्थापित होगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 21, 2026 पर 12:03 PM
बिहार का शहद अब विदेशों में बिकेगा हाथोंहाथ, जानें पूरी कहानी
नई इकाई से बड़े पैमाने पर शहद प्रसंस्करण और गुणवत्ता में सुधार होगा।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर हमेशा किसानों को हर संभव सुविधा देने और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत रहता है। खासकर मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बीएयू ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय को आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ, मुंबई से ₹56.64 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस अनुदान के जरिए विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक शहद प्रसंस्करण और पैकिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जिससे शहद की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों बढ़ेंगे।

इस परियोजना से स्थानीय मधुमक्खी पालकों को सीधे फायदा मिलेगा। बीएयू का लक्ष्य है कि उच्च गुणवत्ता वाला शहद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आय, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिले। यह कदम मधुमक्खी पालन क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मददगार साबित होगा।

उन्नत शहद प्रसंस्करण और पैकिंग यूनिट का निर्माण

इस अनुदान के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक शहद प्रसंस्करण और पैकिंग इकाई स्थापित की जाएगी। इसके लिए बीएयू और आईसीआईसीआई फाउंडेशन के बीच एमओयू भी साइन किया गया है। इस परियोजना से विश्वविद्यालय की प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन 2 क्विंटल से बढ़ाकर 6 क्विंटल हो जाएगी।

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