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पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने उगाई औषधीय फसल, हो रही डबल कमाई

सहारनपुर के बेहट क्षेत्र के खुर्रमपुर गांव के युवा किसान नितिन कुमार सैनी ने पारंपरिक खेती छोड़कर औषधीय फसल खुरसवेनिय अजवाइन (Ammi visnaga) की खेती शुरू की। इसके फूल 80–100 रुपये और बीज 120 रुपये किलो से अधिक में बिकते हैं। एक बीघा से 2–2.5 क्विंटल उत्पादन होकर उन्हें नौकरी से ज्यादा मुनाफा मिल रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 28, 2026 पर 12:01 PM
पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने उगाई औषधीय फसल, हो रही डबल कमाई
इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

सहारनपुर के युवा अब पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि नई और मुनाफेदार फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ कई युवा खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं और नौकरी के बजाय अपनी जमीन से ही बेहतर कमाई कर रहे हैं। इसी बदलाव की मिसाल बेहट विधानसभा के गांव खुर्रमपुर के रहने वाले नितिन कुमार सैनी हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर की पढ़ाई के बाद औषधीय पौधों की खेती को अपना पेशा बना लिया है।

‘खुरसवेनिय अजवाइन’ का अनोखा पौधा

नितिन सैनी इस बार अपने खेत में खुरसवेनिय अजवाइन नाम की खास किस्म की औषधीय फसल उगा रहे हैं। इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसके फूल और बीज दोनों ही बाजार में अच्छे दाम पर बिकते हैं, जिससे किसान को एक ही फसल से दोहरी कमाई का मौका मिलता है।

फूल और बीज दोनों से होती है शानदार आमदनी

नितिन बताते हैं कि इस पौधे पर आने वाले फूल 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिकते हैं, जबकि इसके बीज की कीमत 120 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा मिल जाती है। यानी एक ही पौधे से दो अलग-अलग हिस्सों से आमदनी हो जाती है। इससे खेती की लागत भी आसानी से निकल जाती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

कम जमीन में भी मिल रहा अच्छा उत्पादन

नितिन पिछले चार साल से इस फसल की खेती कर रहे हैं। वे हर साल करीब एक बीघा खेत में इस पौधे को लगाते हैं, जिससे 2 से 2.5 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। इस फसल को अक्टूबर में लगाया जाता है और मार्च के आखिर में इसकी कटाई हो जाती है। इसके बीज हिमाचल प्रदेश से मंगवाए गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने खेत में इसकी सफल खेती शुरू की।

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