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अगली फसल से पहले जरूर करवाएं ये टेस्ट, बढ़ेगा उत्पादन और कम होगा खर्च

खेती में घटती पैदावार की बड़ी वजह मिट्टी की खराब होती सेहत है। मिट्टी परीक्षण से किसान जान सकते हैं कि कौन से पोषक तत्व की कमी है और कितनी खाद जरूरी है। सॉइल हेल्थ कार्ड से सही योजना बनती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और खेती घाटे से निकलकर मुनाफे में बदल सकती है

Anchal Jhaअपडेटेड Apr 04, 2026 पर 10:57 AM
अगली फसल से पहले जरूर करवाएं ये टेस्ट, बढ़ेगा उत्पादन और कम होगा खर्च
मिट्टी जांच से किसान जरूरत के हिसाब से ही खाद डालता है।

आज के समय में किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या घटती पैदावार बनती जा रही है। कई किसान मानते हैं कि मेहनत पहले जैसी ही है, लेकिन फसल का परिणाम वैसा नहीं मिल रहा। इसकी एक अहम वजह है मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। लगातार रासायनिक खाद और उर्वरकों के ज्यादा इस्तेमाल से जमीन की प्राकृतिक ताकत धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।

इससे मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में अब जरूरत है कि किसान सिर्फ खाद पर निर्भर रहने के बजाय मिट्टी की सेहत को समझें और सही तरीके अपनाकर उसकी उर्वरता को बनाए रखें, तभी बेहतर पैदावार संभव हो पाएगी।

मिट्टी जांच क्यों है जरूरी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हर 2-3 साल में मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी है। इससे किसान को पता चलता है कि खेत में कौन सा पोषक तत्व कम है और कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए। जांच के बाद मिलने वाला सॉइल हेल्थ कार्ड जमीन की पूरी “हेल्थ रिपोर्ट” देता है।

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