Shani Vakri 2026 Date: ज्योतिष शास्त्र में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए शनि हमेशा एक दिलचस्प ग्रह रहे हैं। यह ग्रह एक राशि में कम से कम ढाई साल तक सीधे विराजमान रहता है और 5 साल तक नजर रखता है। यानी कुल मिला कर शनि की दृष्टि साढ़े सात तक रहती है। इसे ही शनि की ढैय्या या साढ़े साती कहते हैं। इस अवधि में शनि जातक की तरह-तरह की परीक्षा लेता है और फल देता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि कर्मों के आधार पर फल देने वाला ग्रह है।
इस ग्रह की चाल में कैसा भी बदलाव हो, सबकी नजर रहती है। एक बार फिर इस ग्रह की चाल में बदलाव होने जा रहा है। यह ग्रह इस समय मीन राशि में गोचर कर रहा है। इसी महीने की 27 तारीख को सूर्य पुत्र शनि देव मीन राशि में रहते हुए वक्री हो जाएंगे, यानी अगले 140 दिनों तक ये उल्टी चाल से चलेंगे। शनि की चाल में बदलाव सभी 12 राशियों पर होगा। लेकिन 3 राशियों के लिए यह समय कष्टकारी हो सकता है। इस दौरान करियर में रुकावटें, आर्थिक नुकसान, पारिवारिक तनाव, मानसिक दबाव और मेहनत के बावजूद अपेक्षित सफलता न मिलने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने न्यूज 18 को बताया कि इस दौरान किन राशियों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी और कौन से उपाय करना शुभ रहेगा।
तीन राशियों के लिए मुश्किल समय
मेष राशि : इस राशि के जातकों के लिए आने वाला समय चुनौतियों से भरा रह सकता है। शनि की प्रतिकूल दृष्टि के कारण लंबे समय से घर, प्लॉट, संपत्ति या नया वाहन खरीदने की योजनाओं में रुकावटें आ सकती हैं। आर्थिक दबाव बढ़ने से बड़े फैसले लेना मुश्किल हो सकता है और अनावश्यक खर्च भी परेशान करेंगे।
कर्क राशि : शनि की वक्री चाल कर्क राशि के जातकों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकती है। लंबे समय से अटके कामों में और देरी होने की आशंका है जबकि कार्यक्षेत्र में नई बाधाएं सामने आ सकती हैं। नौकरी और कारोबार में तनाव बढ़ने से आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है। आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें।
शनिवार के दिन श्रद्धापूर्वक ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें। नियमित रूप से हनुमान चालीसा, शनि स्तोत्र और शनि कवच का पाठ करें। शनिदेव की कृपा पाने के लिए काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल, काला छाता या जूते का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही शनि मंदिर में सरसों का तेल अर्पित करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।