Bus Registration Rules: बस रजिस्ट्रेशन के नियमों में होने जा रहा बड़ा बदलाव, स्लीपर बसों की सेफ्टी फोकस में, जानिए क्या-क्या बदलेगा

Bus Registration Rules: केंद्र सरकार यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और बस निर्माण में नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बसों के रजिस्ट्रेशन रुल्स को सख्त करने जा रही है, खासकर स्लीपर कोचों के लिए। सूत्रों ने CNBC-TV18 को यह जानकारी दी।

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 3:21 PM
स्लीपर कोच बसों पर सख्ती की तैयारी, सरकार बदलने जा रही रजिस्ट्रेशन नियम

Bus Registration Rules: केंद्र सरकार यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और बस निर्माण में नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बसों के रजिस्ट्रेशन रुल्स को सख्त करने जा रही है, खासकर स्लीपर कोचों के लिए। सूत्रों ने CNBC-TV18 को बताया कि सरकार जल्द ही मौजूदा बस रजिस्ट्रेशन नियमों में संशोधन करने के लिए एक अधिसूचना भी जारी कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव मुख्य रूप से स्लीपर कोच सेगमेंट में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण किए जा रहे हैं, जिसे तेजी से उच्च जोखिम वाली श्रेणी के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं इन प्रस्तावित नियमों के तहत बसों के निर्माण, फिटिंग और सर्टिफिकेशन पर और सख्त निगरानी की जाएगी, इसके बाद ही उन्हें सड़कों पर चलने की अनुमति दी जाएगी।


सूत्रों के अनुसार, सरकार हर बस के बॉडी और चेसिस फिटमेंट को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित करने पर विचार कर रही है। इसके लिए RTO स्तर पर तकनीक का इस्तेमाल कर जांच और मानकीकरण को बेहतर बनाया जाएगा।

नियमों के तहत की जाएगी सख्त जांच

नए ढांचे के तहत, अधिकारियों द्वारा चेसिस पर बस बॉडी की असेंबली और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पर अधिक सख्त जांच अनिवार्य की जा सकती है, जिसका उद्देश्य संरचनात्मक कमजोरियों को कम करना और यात्रियों की सुरक्षा में सुधार करना है।

इसके अलावा, एक अहम प्रस्ताव यह भी है कि केवल मान्यता प्राप्त (accredited) बस बॉडी निर्माता ही स्लीपर कोच बसें बना सकें।

बता दें कि इस कदम के पीछे वजह यह है कि स्लीपर बसों की डिजाइन और यात्री व्यवस्था के कारण उनमें सुरक्षा जोखिम ज्यादा होता है। इसी को देखते हुए नीति-निर्माता इन पर कड़ी निगरानी और एक समान निर्माण मानकों को लागू करने पर जोर दे रहे हैं।

क्या है सरकार का मकसद?

सरकार का मुख्य उद्देश्य बसों में संरचनात्मक मजबूती, आग से सुरक्षा और यात्री सुरक्षा मानकों में एकरूपता सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो स्लीपर कोचों से जुड़ी दुर्घटनाओं के बाद जांच के दायरे में आए हैं।

बता दें कि यह बदलाव बस बनाने वाली कंपनियों और बॉडी बिल्डर्स के बीच प्रतिस्पर्धा के ढांचे को भी काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव से Original Equipment Manufacturers (OEMs) को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है, क्योंकि बड़ी ऑटो कंपनियों के पास पहले से ही बेहतर विनिर्माण तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण और नियमों के अनुसार उत्पादन की व्यवस्था होती है, जिससे उन्हें मान्यता हासिल करना आसान हो सकता है।

इसके विपरीत, छोटे स्थानीय बॉडी बिल्डरों को प्रस्तावित मानदंडों के तहत उच्च अनुपालन मानकों और अधिक कठोर प्रमाणन आवश्यकताओं का सामना करना पड़ सकता है, जिससे परिचालन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है और प्रवेश में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

यह परिवर्तन बस बॉडी निर्माण उद्योग को अधिक संगठित और औपचारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अभी तक यह क्षेत्र ज्यादातर छोटे और असंगठित स्तर पर काम करता रहा है।

CNBC-TV18 ने 29 मई को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से इस मामले पर टिप्पणी लेने के लिए संपर्क किया था। लेकिन खबर प्रकाशित होने तक मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया।

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