सरकार ने अब ओला और उबर जैसी राइड-हेलिंग सर्विस को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 2025 के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नए नियम के मुताबिक अब कोई भी टैक्सी रजिस्ट्रेशन की तारीख से केवल 8 साल तक ही कमर्शियल इस्तेमाल में रह सकेगी। नए नियम के मुताबिक ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब एग्रीगेटर्स अब केवल आठ साल तक के पुराने वाहनों का ही इस्तेमाल कर सकेंगे। 8 साल पूरे होने के बाद अगर आपकी गाड़ी अच्छी हालत में है तो भी उसे कमर्शियल यूज के लिए रिटायर माना जाएगा। ये नया नियम पूरे भारत में लागू होगा। इसका मकसद यात्रियों की सुरक्षा और सड़क पर बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करना है।
ओला और ऊबर की एक डेटा के मुताबिक, इन दोनों प्लेटफॉर्म्स पर 20 फीसदी गाडियां 8 साल से ज्यादा पुरानी हैं। पुरानी टैक्सियों के कमर्शियल इस्तेमाल से हटने के बाद इन गाड़ियों को रिप्लेस या फिर पर्सनल यूज में इस्तेमाल करना होगा।
अब ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं में यात्री पुरानी टैक्सियों की जगह नई और सुरक्षित गाड़ियों में सफर कर सकेंगे। अब टैक्सियों को 8 साल बाद हटाने के नए नियम से यात्रियों को फायदा होगा। इससे उन्हें एयरबैग और ABS जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स वाली नई और आरामदायक गाड़ियां मिलेंगी। साथ ही पुरानी टैक्सियों की जगह कम धुआं छोड़ने वाली टैक्सियां चलेंगी, जिससे प्रदूषण भी घटेगा और सफर ज्यादा सुरक्षित और साफ-सुथरा होगा।
सरकार के इस नियम के बाद से टैक्सी ड्राइवर्स को काफी नुकसान होने वाला हैं। इसका असर उन टैक्सी चालकों पर ज्यादा होगा, जिन्होंने अपनी गाड़ियों की किश्तें अब तक पूरी नहीं चुकाई हैं। अगर कोई मदद नहीं मिली, तो कई ड्राइवरों को अपनी टैक्सी सेवा बंद करनी पड़ सकती है। हालांकि, ऐसे समय में इलेक्ट्रिक गाड़ियां एक सस्ता और बेहतर विकल्प बन सकती हैं। कई राज्यों में EV खरीदने पर सब्सिडी और टैक्स में छूट भी मिलती है, जिससे इलेक्ट्रिक टैक्सियों को बढ़ावा मिल सकता है।