E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब
Ethanol petrol: सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है
Ethanol petrol : देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है।
देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।
वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।
E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।
क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?
केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।
स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।
माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।
क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?
केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?
सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।
सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।
सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।
EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?
सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।
सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।