अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ से भारत का निर्यात प्रभावित होने लगा है। ये टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हुए। नए डेटा से पता चलता है कि कई प्रोडक्ट कैटेगरी ने शिपमेंट को तेजी से एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप की ओर रीडायरेक्ट कर दिया है, जिससे शुरुआती झटका कम रहा है। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा डेटा के किए गए एनालिसिस के मुताबिक, सितंबर में भारत से अमेरिका को जेम्स और ज्वेलरी का एक्सपोर्ट एक साल पहले के मुकाबले 76 प्रतिशत कम रहा।
फिर भी, इस कैटेगरी में कुल एक्सपोर्ट सिर्फ 1.5 प्रतिशत गिरा। ऐसा इसलिए क्योंकि एक्सपोर्टर्स ने अपना शिपमेंट UAE को 79 प्रतिशत, हांगकांग को 11 प्रतिशत और बेल्जियम को 8 प्रतिशत बढ़ा दिया। ऑटो कंपोनेंट्स के मामले में भी ऐसा ही रहा। सितंबर में अमेरिका को निर्यात 12% की कमी आई। लेकिन जर्मनी, UAE और थाईलैंड से ज्यादा डिमांड की वजह से कुल एक्सपोर्ट 8 प्रतिशत बढ़ गया। मरीन प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट सितंबर में 25 प्रतिशत और अक्टूबर में 11 प्रतिशत बढ़ा। चीन, जापान, थाईलैंड और यूरोपियन यूनियन की ओर से ज्यादा डिमांड के चलते ऐसा हुआ।
स्पोर्ट्स गुड्स का एक्सपोर्ट
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स गुड्स का निर्यात अक्टूबर में 6 प्रतिशत गिर गया। कुल निर्यात में से 40 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। मैन्युफैक्चरर्स को अमेरिका से इतर दूसरे सही मार्केट नहीं मिल पाए। लिहाजा एक्सपोर्ट में गिरावट आई। सितंबर में कॉटन गारमेंट का एक्सपोर्ट 6 प्रतिशत गिरा क्योंकि US में डिमांड 25 प्रतिशत गिर गई। UAE, स्पेन, इटली और सऊदी अरब को ज्यादा शिपमेंट के बावजूद ऐसा हुआ। US से ऑर्डर में भारी गिरावट के बाद लेदर फुटवियर का एक्सपोर्ट 10 प्रतिशत गिर गया।
अमेरिका के हाई टैरिफ के कारण अक्टूबर 2025 में भारत का निर्यात 11.8 प्रतिशत घटकर 34.38 अरब डॉलर रहा था। वहीं व्यापार घाटा बढ़कर 41.68 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण सोने के आयात में वृद्धि है।
अप्रैल-अक्टूबर में समुद्री उत्पादों के निर्यात का आंकड़ा
भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-अक्टूबर अवधि में 16.18 प्रतिशत बढ़कर 4.87 अरब डॉलर हो गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन, वियतनाम, रूस, कनाडा और ब्रिटेन सहित गैर-अमेरिकी बाजारों में अच्छी वृद्धि इसकी प्रमुख वजह रही। 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण अमेरिका को भारतीय समुद्री उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है। अमेरिका भारत के लिए झींगा के एक्सपोर्ट को लेकर सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान अमेरिका को निर्यात में 7.43 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 8.54 करोड़ डॉलर रह गया।
चीन, वियतनाम, बेल्जियम, जापान, रूस, कनाडा और ब्रिटेन को निर्यात में हुई शानदार वृद्धि से इस कमी की भरपाई हो गई। समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से झींगा और प्रॉन के निर्यात में अच्छी वृद्धि के कारण हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 7 महीने की अवधि के दौरान चीन और वियतनाम को झींगा और प्रॉन का निर्यात क्रमशः 24.54 प्रतिशत और 123.63 प्रतिशत बढ़ा। आंकड़ा 56.83 करोड़ डॉलर और 26.16 करोड़ डॉलर रहा। इसी तरह बेल्जियम, जापान, रूस, कनाडा और ब्रिटेन को निर्यात क्रमशः 94.18 प्रतिशत, 10.84 प्रतिशत, 49 प्रतिशत, 13.54 प्रतिशत और 28.81 प्रतिशत बढ़ा।