आरबीआई क्या कमजोर मानसून और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा? सोनल वर्मा का कहना है कि यह जरूरी नहीं है। वर्मा नोमुरा फाइनेंशियल एडवायजरी एंड सिक्योरिटीज (इंडिया) की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इकोनॉमिस्ट (इडिया एंड एशिया एक्स-जापान) हैं।
मानसून की कमजोर बारिश ने बढ़ाया रिस्क
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी का मानना है कि अगर इनफ्लेशन का लेवल हाई बना रहता है तो आरबीआई इस साल के आखिर में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की शुरुआत कर सकता है। हालांकि, दोनों इकोनॉमिस्ट्स यह मानते हैं कि कमजोर मानसून से रिस्क बढ़ा है। लेकिन, इस बारे में उनकी राय अलग-अलग है कि इस पर आरबीआई की प्रतिक्रिया क्या होगी।
नोमुरा को ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान
वर्मा का मानना है कि मानसून की बारिश को लेकर चिंता के बावजूद इकोनॉमी की बुनियाद मजबूत है। उन्होंने इस वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। उनकी दलील है कि क्रूड ऑयल और एनर्जी की कीमतों में नरमी के चलते कृषि उत्पादन में कमी और ग्रामीण इलाकों में कमजोर मांग का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में कम रह सकता है कंज्म्पशन
उन्होंने कहा, "एनर्जी की कीमतों में नरमी से जीडीपी की ग्रोथ करीब 20 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ सकती है।" लेकिन, रूरल कंजमप्शन में नरमी की वजह से ग्रोथ करीब 20-30 बेसिस प्वाइंट्स कम रह सकती है। इससे कुल मिलाकर आउटलुक पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है।
ज्यादा तापमान का फसलों पर पड़ेगा खराब असर
भंडारी का रुख ज्यादा सावधानी भरा है। एचएसबीसी ने इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ग्रोथ में ज्यादा सुस्ती दिख सकती है। भंडारी का कहना है कि बड़ी चिंता सिर्फ सामान्य से कम बारिश नहीं है बल्कि असाधारण ज्यादा तापमान भी है। इसका असर फसलों और पशुधन पर पड़ सकता है।
धान, गेहूं, दलहन और खाद्य तेलों के उत्पानद पर पड़ेगा असर
भंडारी ने कहा, "हम सभी को बारिश के बारे में पता है। लेकिन, मेरी ज्यादा चिंता ज्यादा तापमान को लेकर है। ज्यादा तापमान का असर धान, गेहूं, दलहन, खाद्य तेलों के साथ ही अंडा, मांस और मछलियों के उत्पादन पर पड़ सकता है। दोनों इकोनॉमिस्ट्स यह मानते हैं कि फसलों के उत्पादन पर दबाव की वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
औसत फूड इनफ्लेशन 6 फीसदी तक पहुंच सकता है
वर्मा ने इस वित्त वर्ष में औसत फूड इनफ्लेशन 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इसमें दलहन, खाद्य तेल और सब्जियों का बड़ा हाथ होगा। लेकिन, एलपीजी और एविएशन फ्यूल की कीमतों में नरमी से एनर्जी की कॉस्ट घटने से रिटेल इनफ्लेशन में ज्यादा उछाल नहीं आएगा। दोनों इकोनॉमिस्ट्स के बीच मतभेद मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर है। वर्मा का मानना है कि आरबीआई इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाएगा। भंडारी का मानना है कि आरबीआई इंटरेस्ट रेट दो बार बढ़ा सकता है।