रिटेल इनफ्लेशन मई में बढ़कर 3.93% पर पहुंचा, लगातार पांचवें महीने बढ़ी महंगाई

यह 2026 में महीने दर महीने आधार पर इनफ्लेशन में सबसे बड़ा उछाल है। इस साल जनवरी में इनफ्लेशन 2.74 फीसदी था। इससे यह संकेत मिलता है कि मध्यपूर्व में लड़ाई का असर अब जरूरी चीजों की कीमतों पर दिखने लगा है

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 6:05 PM
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अप्रैल के मुकाबले मई में महंगाई फीसदी में 0.75 फीसदी बढ़ी है।

सरकार ने मई के महंगाई के डेटा जारी कर दिए। मई में रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुचं गया। अप्रैल में यह 3.48 फीसदी था। यह 2026 में महीने दर महीने आधार पर इनफ्लेशन में सबसे बड़ा उछाल है। इस साल जनवरी में इनफ्लेशन 2.74 फीसदी था। इससे यह संकेत मिलता है कि मध्यपूर्व में लड़ाई का असर अब जरूरी चीजों की कीमतों पर दिखने लगा है।

मानसून में कम बारिश बढ़ाएगी महंगाई

अप्रैल के मुकाबले मई में महंगाई फीसदी में 0.75 फीसदी बढ़ी है। कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा, "4 फीसदी से नीचे का रिटेल इनफ्लेशन और कोर इनफ्लेशन के डेटा से शॉर्ट टर्म में राहत जारी रहने का संकेत मिलता है। क्रूड की कीमतों में नरमी आ रही है और रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। अब नजरें फूड इनफ्लेशन पर मानसून के असर पर लगी हैं। फिलहाल हमारा मानना है कि अक्तूबर में इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा हो सकता है।"


खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर

रिटेल इनफ्लेशन में उछाल में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई तेजी का बड़ा हाथ है। मई में कंज्यूमर फूड इनफ्लेशन बढ़कर 4.78 फीसदी पर पहुंच गया। अप्रैल में यह 4.2 फीसदी था। ग्रामीण इलाकों में फूड इनफ्लेशन 4.85 फीसदी पर पहुंच गया। यह शहरी इलाकों में 4.66 फीसदी के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है।

रिटेल इनफ्लेशन अनुमान के मुताबिक

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के राजीव शरण ने कहा कि मई में रिटेल इनफ्लेशन के डेटा अनुमान के मुताबिक हैं। फूड इनफ्लेशन बढ़कर 4.78 फीसदी पहुंच जाने का मतलब है कि जल्द खराब होने वाली चीजों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खासकर टमाटर, अदरक और दूसरी सब्जियों पर यह बात लागू होती है। कोर इनफ्लेशन करीब 3.7 फीसदी पर बना रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि रिटेल इनफ्लेशन में उछाल में फूड इनफ्लेशन का बड़ा हाथ है।

6 फीसदी के पार जा सकता है इनफ्लेशन

क्रूड की कीमतों में उछाल और अल-नीनो के संभावित असर से रिटेल इनफ्लेशन के लिए रिस्क बढ़ा है। अगर मानसून में बारिश कम होती है तो इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। इधर, क्रूड में उछाल से देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कई बार बढ़ चुकी हैं। आनंदराठी ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट सुजान हाजरा ने कहा कि अगले छह महीनों में रिटेल इनफ्लेशन 6 फीसदी के पार जा सकता है।

 

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