एसएंडपी ने इंडिया के बारे में बड़ी बात कही है। उसने कहा है कि इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के बेनेफिशियरी के रूप में अभी नहीं उभरा है। लेकिन, इसका इकोनॉमिक ग्रोथ आउटलुक स्ट्रॉन्ग घरेलू मांग की वजह से ठोस बना हुआ है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में चीफ एपीएसी इकोनॉमिस्ट लुइस कुइज्स ने यह बात कही है।
सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाले देशों में जा रहा निवेश
उन्होंने कहा कि अभी एआई-से जुड़ा ज्यादातर निवश उन इकोनॉमीज में जा रहा है, जिनकी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और चिप सप्लाई चेन में सीधी भूमिका है। इनमें ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश हैं, जिनकी इकोनॉमी को लेकर बीते कुछ महीनों में सबसे ज्यादा अपग्रेड देखने को मिला है।
एआई से जुड़ी इकोनॉमी की ग्रोथ में ज्यादा अपग्रेड दिखा है
उन्होंने कहा कि जब हम पिछले डेढ़ साल के अपने अनुमान पर नजर डालते हैं तो हम पाते हैं कि इनमें ऐसी इकोनॉमीज हैं जो इस पूरी एआई स्टोरी से जुड़ी हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन से जुड़ी दूसरी इकोनॉमीज में भी इसी तरह का ट्रेंड देख रही है। इनमें मलेशिया, चीन और जापान शामिल हैं।
भारत को मजबूत घरेलू मांग का मिल रहा बड़ा फायदा
जो देश चिप मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा एक्विट नहीं हैं, उनमें भी ग्रोथ दिख रही है, लेकिन यह ग्रोथ उतनी नहीं है जितनी चिप बनाने वाले देशों की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंडिया पिछड़ रहा है। इंडियन इकोनॉमी को उसके मजबूत घरेलू मांग का फायदा मिल रहा है। यह भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।
एसएंडपी ने इंडिया की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई
एसएंडपी को इंडिया की ग्रोथ करीब 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह ग्रोथ के आरबीआई के अनुमान के करीब है। हालांकि, कुइज्स का मानना है कि एआई बूम अपेक्षाकृत कमजोर बुनियाद पर खड़ा है। एआई को लेकर ज्यादा उम्मीद का आधार कुछ मुट्ठीभर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा निवेश है। ये कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में बड़ा निवेश कर रही हैं।
एआई का फायदा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला तो कई देशों को होगी दिक्कत
उन्होंने कहा कि अगर इन कंपनियों को एआई पर अपने इनवेस्टमेंट का फायदा मिलने में दिक्कत आती है तो इसका असर पूरे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर दिखेगा। इसका असर उनक इकोनॉमीज पर भी दिखेगा जिन्हें एआई ट्रेड से फायदा हुआ है। इधर, इंडिया की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स काफी डायवर्सिफायड हैं। घरेलू खपत से इकोनॉमी को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।