Sarthak Siddhant महज 17 साल की उम्र में सीबीएसई के ओएमए सिस्‍टम की खामियां बताईं, देश के लाखों युवाओं के आइकन बने

Sarthak Siddhant सिर्फ 17 साल की उम्र में देश के लाखों युवाओं के आइकन बन गए हैं। उन्‍होंने अपने ब्‍लॉग में सीबीएसई के ओएसएम व्‍यवस्‍था की खामियां उजागर करने वाले सार्थक बेंगलुरु के इंजीनियरिंग संस्‍थान से बीटेक करना चाहते हैं

अपडेटेड Jun 05, 2026 पर 2:48 PM
सार्थक सिद्धांत झारखंड के रांची के 12वीं कक्षा के छात्र हैं।

Sarthak Siddhant यह नाम है 17 साल के उस युवा का जिसके ब्‍लॉग ने सीबीएसई के ओएसएम व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाया और उसकी कमियां उजागर कीं। इतना ही नहीं, सार्थक सिद्धांत वही साहसी और आत्‍मविश्‍वास से लबरेज युवा हैं, जिन्‍होंने संसदीय समिति के सामने भी बिना डरे ओएसएम की कमियां उजागर कीं। इसी साल सीबीएसई बोर्ड से 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले सार्थक के लिए इन तकनीकी बारीकियों को पकड़ना अचानक बना संयोग नहीं है। कंप्‍यूटर इंजीनियरिंग से जुड़े माता-पिता की संतान होने के नाते तकनीक से उनका संबंध पैदाइशी है।

सार्थक सिद्धांत झारखंड के रांची के 12वीं कक्षा के छात्र हैं। सीबीएसई बोर्ड से 12वीं कक्षा करने वाले सार्थक ने रिजल्‍ट आने के बाद अपनी आंसर शीट की स्कैन्ड कॉपी मांगी और अपने मार्क्स में अंतर देखा। उनके जैसे अन्‍य छात्रों ने जब आंसर शीट के डिजिटल इवैल्यूएशन में संभावित गलतियों और ट्रांसपेरेंसी को लेकर चिंता जताई, तो उन्होंने इस मामले की जांच शुरू की। महज 3 साल की उम्र में कंप्‍यूटर और माउस से दोस्‍ती करने वाले सार्थक ने सीबीएसई ओएसएम व्‍यवस्‍था में खामियां उजागर करने वाला एक ऐसा ब्‍लॉग लिखा, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई पड़ी। इस पूरे मामले ने सार्थक को एक युवा तकनीकी विश्लेषक और व्हिसलब्लोअर के रूप में पहचान दिलाई।

ओएसएम की कमियों पर ब्‍लॉग लिख चर्चा में आए

सार्थक सिद्धांत केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और उससे जुड़े टेंडर डॉक्यूमेंट्स का एनालिसिस कर एक लंबा ब्लॉग पब्लिश किया। उन्‍होंने सार्वजनिक मंचों पर मौजूद सीबीएसई के प्रोक्योरमेंट और टेंडर डॉक्यूमेंट्स के अलग-अलग वर्जन की तुलना करने पर फोकस किया। सिद्धांत ने दावा किया है कि उन्होंने बिडिंग के लगातार राउंड में कई बदलाव देखे। उन्होंने टेंडर डॉक्यूमेंट्स में एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, परफॉर्मेंस क्लॉज और सर्टिफिकेशन की जरूरतों में बदलावों की ओर इशारा किया है, जिसके बारे में उनका कहना है कि ये प्रोसेस पर सवाल उठाते हैं। सार्थक के इस ब्‍लॉग की गूंज सोशल मीडिया से होती हुई संसद के गल‍ियारों तक भी सुनी गई। श‍िक्षा मामलों पर बनी संसद की स्‍थायी समिति के सामने पेश होकर उन्‍होंने बिना डरे सीबीएसई के ओएसएम सिस्‍टम पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश की और इसकी टेंडर प्रक्र‍िया पर चिंता जताई।

खुद नई-नई चीजें सीखकर मजबूत की अपनी समझ

बचपन से ही कंप्यूटरों के बीच रहने की वजह से तकनीक में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। समय के साथ उन्होंने खुद नई-नई चीजें सीखकर अपनी समझ को और मजबूत किया। कक्षा 6 और 7 के दौरान उन्होंने इंटरनेट और उपलब्ध संसाधनों की मदद से प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया। इसके बाद उन्‍होंने कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की ओर कदम बढ़ाया। बिना किसी ट्रेनिंग के उन्होंने तकनीकी विषयों को समझना शुरू किया और लगातार नए क्षेत्रों की खोज करते रहे। रोबोटिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बारे में सीखना शुरू किया।


वर्ष 2023 के आसपास उन्होंने AI को गंभीरता से समझना शुरू किया। कक्षा 12 में सार्थक ने फिजिक्स, केमिस्ट्री , मैथेमेटिक्स, कंप्यूटर साइंस और अंग्रेजी जैसे विषय चुने। उनके तकनीकी झुकाव और सेल्फ स्टडी का असर उस सीबीएसई के ओएसएम विवाद के दौरान इस विषय पर लिखे गए ब्‍लॉग में भी देखने को मिला। उन्होंने स्कैनर, इमेज क्वालिटी, डीपीआई सेटिंग्स और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली जैसे तकनीकी विषयों पर यों विस्तार से बात की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वर्षों की मेहनत ने उन्हें तकनीक की गहरी समझ दी है। सार्थक फिलहाल इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उनकी प्राथमिकता बेंगलुरु में किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेना है।

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