CBSE 12th Result 2026: बोर्ड ने बताया क्यों बिगड़ा 12वीं का रिजल्ट, इस बार रटने वालों को नहीं समझने वालों को मिले नंबर

CBSE 12th Result 2026: सीबीएसई बोर्ड के 12वीं कक्षा का रिजल्ट आने के बाद से खड़ा हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। बोर्ड ने ओएसएम का बचाव करते हुए कहा है कि इस बार मूल्यांकन में विषय को समझ कर जवाब लिखने वाले छात्रों को नंबर मिले हैं, रटने वालों को नहीं। आइए जानें

अपडेटेड May 19, 2026 पर 10:52 AM
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इस साल 85.20% छात्र पास हुए, जो पिछले साल के 88.39% की तुलना में क़रीब तीन प्रतिशत कम है।

CBSE 12th Result 2026: सीबीएसई बोर्ड के 12वीं कक्षा के छात्र रिजल्ट जारी होने के बाद से काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पेपर में अच्छे और पर्याप्त उत्तर लिखे थे। लेकिन ओएसएम की वजह से उन्हें कम नंबर दिए गए हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के छात्रों का है। इनमें से काफी छात्र ऐसे हैं, जिनका जेईई मेन में 95-99 तक पर्सेंटाइल रहा है, लेकिन सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट में 75 से कम नंबर मिले हैं।

रिजल्ट आने के बाद से सोशल मीडिया पर 12वीं के छात्र, अभिभावक और टीचर्स लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। सीबीएसई बोर्ड ने सभी पक्षों की चिंताओं को देखते हुए इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी तरह की चिंताओं का समाधान पेश करने की कोशिश की। छात्रों ने इसके लिए जहां सीबीएसई द्वारा 12वीं में लागू की गई ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम (OSM) को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि इस बार पारदर्शिता और निष्पक्षता से मूल्यांकन किया गया है। नंबर विषय को समझ कर उत्तर देने वाले परीक्षार्थियों को दिए गए हैं, न कि रट कर जवाब लिखने पर।

सीबीएसई ने 17 मई को आयोजित प्रेस वार्ता में माना कि इस साल कई विषयों में छात्रों को पिछले कई सालों की तुलना में कम नंबर मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने बताया कि फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में कटऑफ 1 से 3 अंक तक नीचे आए हैं। बोर्ड का कहना है कि इस बार मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा तैयार मार्किंग स्कीम के अनुसार किया गया, जिसमें रटकर लिखने या शॉर्टकट के बजाय विषय की असली समझ को ज्यादा महत्व दिया गया। सीबीएसई ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और समान रही है तथा छात्रों को पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन का विकल्प भी दिया गया है।

इस साल छात्रों को सबसे ज्यादा निराशा फिजिक्स, केमिस्टी, मैथ्स, अकाउंटेंसी और इकोनॉमिक्त विषयों में रही। इनमें ग्रेड ए1 की शुरुआत 85 अंक से हुई, जो पिछले कई सालों में काफी कम है। इस साल ह्यूमैनिटीज विषयों के छात्रों को थोड़ी राहत रही है, क्योंकि इनका रिजल्ट पिछले कई सालों में अच्छा रहा है।

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