CBSE Re-Evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के छात्रों ने जिस तरह से री-इवैल्युएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन पोर्टल पर रिस्पॉन्स दिया है, उसने बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड ने 2 से 7 जून के बीच री-इवैल्युएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन पोर्टल खोला था, जिस पर 1.6 लाख छात्रों ने 3.8 लाख कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और अंक सत्यापन के लिए आवेदन किया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि इस साल छात्र बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया से खुश नहीं हैं। इतना ही नहीं, छात्रों ने सोशल मीडिया पर बोर्ड के ‘पोस्ट रिजल्ट सर्विस पोर्टल’ में भी तकनीकी कमियां और एरर के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सीबीएसई के री-इवैल्युएशन एंड मार्क्स वेरिफिकेशन पोर्टल पर महज 5 दिनों के अंदर 1.6 लाख से अधिक छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा समीक्षा कराने के लिए आवेदन कर चुके हैं। सीबीएसई से मिले ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक, 2 जून से 7 जून 2026 के बीच खुली आवेदन विंडो के दौरान रिकॉर्ड तोड़ रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। इस अवधि में डेढ़ लाख से अधिक छात्रों ने कुल 3.8 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और रीइवैल्युएशन के लिए सफलतापूर्वक अनुरोध जमा किए हैं। स्टूडेंट्स एक से अधिक विषयों में अपने अंकों की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, जो दिखाता है कि इस बार मूल्यांकन को लेकर बच्चों में कितना बड़ा असमंजस है।
इस भारी असंतोष के बीच स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर सीबीएसई के ‘पोस्ट-रिजल्ट सर्विस पोर्टल’ में तकनीकी कमियां होने और एरर आने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विवाद बढ़ता देख अब खुद सीबीएसई ने सामने आकर इस पूरे मामले पर अपनी विस्तृत सफाई पेश की है. सीबीएसई बोर्ड ने न सिर्फ पोर्टल के सुचारु चलने का दावा किया है, बल्कि ‘रोल नंबर नॉट फाउंड’ जैसे टेक्निकल मेसेज के पीछे की असली वजह भी साफ कर दी है।
सोशल मीडिया पर तकनीकी दिक्कतों और एरर की शिकायतों का अंबार
सीबीएसई बोर्ड की री-वैल्यूएशन की विंडो 2 से 7 जून तक छात्रों के आवेदन के लिए खोली गई थी। सोशल मीडिया पर छात्रों ने पोर्टल के क्रैश होने और तकनीकी दिक्कतों का आरोप लगाया है। हालांकि, सीबीएसई बोर्ड ने शिकायतों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पोर्टल पूरी तरह चालू और कार्यरत है। बोर्ड के मुताबिक, इस डिजिटल ट्रैफिक को संभालने के लिए सरकारी तकनीकी एजेंसियों के साथ-साथ आईआईटी (IIT) की विशेष टीमें लगाई गई थीं पूरे समय साइबर सुरक्षा टीमें इसकी मॉनिटरिंग करती रहीं, जिससे किसी भी छात्र को फॉर्म भरने में दिक्कत न आए।
कई छात्रों ने आवेदन के दौरान स्क्रीन पर ‘Roll Number Not Found’ का मेसेज दिखाई देने का भी आरोप लगाया था। इस पर बोर्ड ने साफ किया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं है। दरअसल, नियमों के मुताबिक रीइवैल्युएशन की प्रक्रिया 3-स्टेप में होती है। यह संदेश केवल उनको दिखा, जिन्होंने पहले चरण में अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं किया था। नियम के अनुसार केवल वही छात्र अगले चरण के लिए पात्र थे, जिन्होंने पहला स्टेप पूरा किया था।