CBSE re-evaluation 2026: सीबीएसई बोर्ड से शैक्षिक सत्र 2026-27 में 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद से उठा बवाल अभी तक थमता नहीं दिख रहा है। सीबीएसई बोर्ड के सिर्फ रिजल्ट ने ही छात्रों को परेशान नहीं किया है, बल्कि री-इवैल्युएशन प्रक्रिया ने भी छात्रों के छक्के छुड़ा दिए हैं। अब फरीदाबाद के एक स्कूल के 12वीं कक्षा के दो छात्रों ने आरोप लगाया है कि जिन विषयों के लिए उन्होंने कभी अप्लाई नहीं किया था, उनके री-इवैल्यूएशन में उनके अंक कम कर दिए गए, जबकि जिन पेपर्स के लिए उन्होंने रिव्यू के लिए रिक्वेस्ट की थी, उनके स्कोर बढ़ गए।
इस खबर ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, बोर्ड ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को भी एक बार फिर पुख्ता कर दिया है। बता दें, इन दोनों मामलों का खुलासा द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक हुए बदलावों ने दोनों छात्रों के फाइनल रिजल्ट स्टेटस को 'पास' से बदलकर 'रिपीट इन थ्योरी' (RT) कर दिया, जिससे उनकी आगे की योजनाओं पर संकट खड़ा हो गया है। खासतौर, से तब जब कि यूनिवर्सिटी लगातार अपने एडमिशन विंडो बंद कर रही हैं।
री-इवैल्यूएशन के बाद दो विषयों में नंबर बढ़े, एक में घट गया
पहले मामले में, एक छात्रा ने 12वीं कक्षा के रिजल्ट आने के बाद केमिस्ट्री और होम साइंस के लिए री-इवैल्यूएशन की मांग की थी। पुनर्मूल्यांकन के बाद केमिस्ट्री में अंक बढ़कर 42 से 52 और होम साइंस में 70 से 79 हो गए। लेकिन, रिवाइज़्ड मार्कशीट में कथित तौर पर छात्र का ओवरऑल रिजल्ट RT हो गया। इसमें उसका मैथ्स में स्कोर 46 से घटकर 40 हो गया था, जबकि उस सब्जेक्ट के लिए कोई रिव्यू रिक्वेस्ट नहीं की गई थी।
ऐसा ही मामला, दूसरे छात्र के साथ भी हुआ। इस छात्र ने सिर्फ फिजिक्स और कंप्यूटर साइंस में री-इवैल्यूएशन का आवेदन करने के बाद, दोनों विषयों में मार्क्स बढ़ गए। फिर भी, रिवाइज्ड मार्कशीट में कथित तौर पर केमिस्ट्री के मार्क्स 52 से घटकर 43 दिखाए गए, वह भी उस पेपर में जो री-इवैल्यूएशन के लिए सबमिट नहीं किया गया था।
दोनों छात्र डीएवी पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद के हैं। उनके परिवारों ने सीबीएसई रीजनल ऑफिस में जाकर कहा है कि री-इवैल्यूएशन रिक्वेस्ट के अलावा दूसरे विषयों के नंबरों में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि अचानक हुए बदलावों से हायर एजुकेशन में प्रवेश खतरे में पड़ गया है। इससे छात्रों का साल बर्बाद हो सकता है। स्कूल ने भी सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक को लिखा है, जिसमें मामले की तुरंत समीक्षा करने की अपील की गई है।
बोर्ड ने मामले को ‘पॉलिसी मैटर’
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल प्रिंसिपल ने कहा कि अधिकारियों ने इनफॉर्मल तौर पर इस मामले को "पॉलिसी मैटर" बताया था। उन्होंने दावा किया था कि पहले दिए गए ग्रेस मार्क्स वापस ले लिए गए थे। हालांकि, प्रिंसिपल ने कहा कि स्कूल को ऐसी किसी पॉलिसी के बारे में पता नहीं था और बोर्ड ने कोई फॉर्मल नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था।
कोई पॉलिसी नहीं, कोई जवाब नहीं?
इस विवाद ने इस बात पर भी ध्यान खींचा है कि क्या CBSE के पास कोई औपचारिक नियम है जिससे री-इवैल्यूएशन के लिए नहीं चुने गए विषयों के नंबर कम किए जा सकें या पहले दिए गए ग्रेस मार्क्स वापस लिए जा सकें।