IIT Kanpur: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुना गया है। प्रोफेसर भट्टाचार्य को यह सम्मान उनके शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जा रहा है। रिकॉर्ड के मुताबिक, भट्टाचार्य की रिसर्च अलग-अलग लंबाई के स्केल पर फंक्शनल मटीरियल के डिजाइन और डेवलपमेंट और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस पर फोकस करती है। इसमें बायो-MEMS, लैब-ऑन-चिप सिस्टम, नैनोटेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिज़ाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस जैसे एप्लीकेशन शामिल हैं।
आईआईटी कानपुर के साथ बतौर प्रोफेसर शिक्षण सेवा देने के अलावा, प्रोफेसर भट्टाचार्य अभी सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ के निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं। साथ ही, वही सीएसआईआर-सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CEERI), पिलानी में डायरेक्टर का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं।
आईआईटी कानपुर ने प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य की इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर एक सोशल मीडिया पोस्ट की। इसमें संस्थान की ओर से कहा गया, "प्रो. भट्टाचार्य की इनोवेटिव रिसर्च बायो एमईएमएस, लैब ऑन चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिजाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस के क्षेत्र में फंक्शनल मटीरियल और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस (अलग-अलग लंबाई के स्केल पर) के डिजाइन और डेवलपमेंट से संबंधित है।" साथ ही पोस्ट में कहा गया, ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. शांतनु भट्टाचार्य को 1 जनवरी, 2027 से द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुने जाने पर हार्दिक बधाई।’ यह फेलोशिप "वैज्ञानिक के शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए" दी गई है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया 1930 में बनी थी। इसका मकसद साइंस और टेक्नोलॉजी को सभी ब्रांच में बढ़ाना और बढ़ावा देने के साथ ही भारतीय वैज्ञानिकों के शोधकार्य के विचारों के लेन-देन और प्रकाशन के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इस एकेडमी को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) से वित्तीय मदद मिलती है। इसे भारत सरकार के डिपार्टमेंट फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (DSIR) से साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के तौर पर भी पहचान मिली है।