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JEE Admission 2026: आईआईटी रुड़की से 75% अंकों की शर्त में राहत नहीं, सीबीएसई के संपर्क में हैं आईआईटी

JEE Admission 2026: आईआईटी रुड़की ने देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्‍थानों में प्रवेश के लिए 75% अंक जरूरी होने की शर्त में राहत देने से मना कर दिया है। हालांकि, यह संस्‍थान लगातार सीबीएसई के संपर्क में बना हुआ है। आइए जानें क्‍या है पूरा मामला

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 05, 2026 पर 11:25 AM
JEE Admission 2026: आईआईटी रुड़की से 75% अंकों की शर्त में राहत नहीं, सीबीएसई के संपर्क में हैं आईआईटी
आईआईटी/एनआईटी में दाखिले की प्रक्रिया में 36 एजुकेशन बोर्ड के छात्र हिस्‍सा लेते हैं।

JEE Admission 2026: जेईई एडवांस्‍ड में अच्‍छी रैंक से सफल होकर देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्‍थान में प्रवेश का सपना देखने वाले सीबीएसई बोर्ड के 12वीं के छात्रों के लिए यह बड़ झटका है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रुड़की ने सीबीएसई मार्क्स विवाद को लेकर चल रही चिंताओं के बावजूद इस साल जेईई प्रवेश के लिए 75% एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में ढील देने से इनकार कर दिया है। संस्‍थान ने कहा कि जेईई के जरिए देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्‍थान में दाखिले की प्रक्रिया में 36 अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड के छात्र हिस्‍सा लेते हैं।

जेईई एडवांस्‍ड 2026 का रिजल्ट आ चुका है, इसके बाद अब लाखों छात्रों की नजर आईआईटी और एनआईटी में प्रवेश प्रक्रिया पर है। इस बीच सीबीएसई के रिजल्ट, री-इवैल्यूएशन और अंकों से जुड़ी गड़ब‍ड़‍ियों को देखते हुए इस साल आईआईटी में दाखिले के लिए 12वीं में 75% अंकों की अनिवार्य शर्त में राहत की मांग उठ रही थी। हालांकि, अब आईआईटी रुड़की ने इस मामले पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। संस्थान ने साफ किया है कि इस साल आईआईटी और एनआईटी में प्रवेश के अंकों की अनिवार्यता वाले नियमों में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

36 बोर्ड के छात्र लेते हैं आईआईटी एडमिशन प्रोस‍ेस में हिस्‍सा

इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या इंस्टीट्यूट प्रभावित स्टूडेंट्स के लिए मार्क्स में एक बार की ढील देने पर विचार कर रहा है? आईआईटी रुड़की ने कहा कि ऐसा कदम मुमकिन नहीं होगा क्योंकि एडमिशन प्रोसेस में 36 अलग-अलग शैक्षिक बोर्ड के छात्र हिस्सा लेते हैं। आईआईटी रुड़की ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “मार्क्स में कोई ढील नहीं दी जाएगी क्योंकि 36 अलग-अलग बोर्ड के कैंडिडेट हिस्सा ले रहे हैं। हमने यह क्राइटेरिया लगभग दिसंबर में ही प्रकाशित कर दिया था। पिछले साल कुछ कैंडिडेट ऐसे थे जिन्हें मुख्य रूप से परसेंटेज की वजह से आईआईटी/एनआईटी सीटें गंवानी पड़ी थीं।” इंस्टीट्यूट ने आगे कहा कि इस स्‍तर पर कट-ऑफ कम करने से सभी बोर्ड के छात्रों में निष्‍पक्षता और समानता की चिंता पैदा हो सकती है।

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