JEE-NEET Exam: जेईई और नीट परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले छात्रों को सरकार के इस फैसले से काफी राहत मिल सकती है। सरकार देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत आने वाले समय में जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा की मेरिट लिस्ट में 12वीं कक्षा के नंबरों की निर्णायक भूमिका हो सकती है। बोर्ड के नंबरों को मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 50% वेटेज दिया जा सकता है। समझा जा रहा है, इस कदम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर प्रदर्शन का दबाव कम होगा और स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी।
केंद्र सरकार ने पिछले साल शिक्षा मंत्रालय के तहत 9 सदस्यों की एक समिति का गठन किया था। इसे कोचिंग पर लगातार बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों के चलन पर निगरानी के लिए किया गया था। ये समिति अब जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा के जरिए मेडिकल-इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था में संभावित सुधारों की समीक्षा कर रही है। इस समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।
अभी जहां, मेडिकल में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को नीट यूजी परीक्षा देनी होती है। वहीं, इंजीनियरिंग के लिए स्टूडेंट्स जेईई देते हैं। इन एंट्रेंस एग्जाम में मिले स्कोर और कट-ऑफ मार्क्स के आधार पर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हालांकि, छात्रों को मेडिकल-इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग क्राइटेरिया भी पूरा करना होता है।
नीट और जेईई में बड़े बदलाव की तैयारी
यह प्रस्ताव पूरे देश में परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर बार-बार उठ रही चिंताओं के बाद आया है। मूल्यांकन की गलतियों और कथित पेपर लीक ने मौजूदा प्रवेश व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब ऐसे तरीकों की जांच की जा रही है, जिनसे निष्पक्षता में सुधार हो सके और लोगों का भरोसा मजबूत हो सके। न्यूज एजेंसी पीटीआई को सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है। सूत्रों ने बताया, "जिन बदलावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एडमिशन या मेरिट लिस्ट तैयार करने में बोर्ड के नंबरों को 50% वेटेज देना, कोचिंग सेंटरों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के लिए प्रवेश परीक्षाओं के सिलेबस को स्कूल के सिलेबस से बेहतर तरीके से जोड़ना, परीक्षा के लिए कई मौके देना और धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित ऑन-डिमांड टेस्ट की तरफ बढ़ना शामिल है।
सूत्रों ने कहा कि प्रस्ताव सिर्फ एक परीक्षा पर निर्भरता कम करने की कोशिश करता है। छात्रों को शैक्षिक प्रदर्शन के आकलन से फायदा हो सकता है। प्रवेश के दौरान बोर्ड परीक्ष के रिजल्ट भी उतने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्रवेश परीक्षा का रोल अहम बना रहेगा, लेकिन उनका ओवरऑल असर तुलना में कम हो सकता है।
अभी क्या है प्रवेश व्यवस्था
अभी, मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रोग्राम में प्रवेश मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षा के स्कोर के आधार पर होता है। छात्रों को बोर्ड एग्जाम में क्वालिफाइंग मार्क्स लाने होते हैं। वे बोर्ड मार्क्स अभी फाइनल एडमिशन मेरिट के बजाय एलिजिबिलिटी तय करते हैं। प्रस्तावित बदलाव इस लंबे समय से चले आ रहे एडमिशन फ्रेमवर्क को बदल सकते हैं। अगर इसे लागू किया जाता है, तो एकेडमिक कंसिस्टेंसी और एंट्रेंस परफॉर्मेंस, दोनों ही सिलेक्शन पर असर डालेंगे।