Study Abroad India: हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं। लेकिन, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई के मकसद से विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। यह क्रम लगातार दूसरे साल बना रहा है। 2025 में विदेश जाते समय 6,19,264 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपनी यात्रा का मकसद बताया। यह 2024 में 7,60,060 और 2023 में 8,94,758 से कम था। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।
एक तरफ, विदेश में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। वहीं, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (USA) के फॉरेन हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स (FHEIs) को 16 लेटर ऑफ इंटेंट (LoIs) जारी किए हैं। यूजीसी ने कर्नाटक में छह, महाराष्ट्र में छह, दिल्ली एनसीआर में तीन और तमिलनाडु में एक एफएचईआई को एनओआई जारी किए हैं। महाराष्ट्र के छह एलओआई में से, चार एफएचईआई (यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) को मुंबई में एकेडमिक ऑपरेशन शुरू करने के लिए लेटर ऑफ अप्रूवल दिया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स ने पहले ही गुरुग्राम और बेंगलुरु में अपने कैंपस बना लिए हैं।
भारतीय छात्रों की विदेश में पढ़ाई करने की संख्या कम होने के साथ ही कई प्रतिष्ठित भारतीय संस्थानों ने अपने ओवरसीज कैंपस खोले हैं। विदेश में कैंपस खोलने वाले संस्थानों में आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान शामिल हैं। आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद ने क्रमशः 2023 में जांजीबार, 2024 में अबू धाबी और 2025 में दुबई में अपने विदेशी परिसर स्थापित किए हैं। आईआईएम अहमदाबाद ने मध्य-पूर्व, एशिया और अफ्रीका के छात्रों के लिए सितंबर 2025 में दुबई परिसर में एक साल का पूर्णकालिक एमबीए कार्यक्रम और एक सामान्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम में 35 छात्र हैं।
इधर, बीओआई द्वारा जारी विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों का पांच साल का डेटा महामारी के बाद तेजी से बढ़ोतरी और फिर लगातार गिरावट दिखाता है। 2021 में, 4,45,580 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपना घोषित मकसद बताकर विदेश यात्रा की। 2022 में यह संख्या बढ़कर 7,52,100 हो गई और फिर 2023 में और बढ़कर 8,94,758 हो गई। तब से, यह संख्या 2024 में घटकर 7,60,060 और 2025 में 6,19,264 हो गई है।
कोविड के बाद 2022 में पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या में लगभग 69% की बढ़ोतरी हुई। 2023 में यह और 19% बढ़ी। लेकिन 2024 में दिशा बदल गई। पिछले साल की तुलना में यह संख्या लगभग 15% कम हो गई। 2025 में यह गिरावट और बढ़ गई। विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 18.5% की कमी आई। 2025 में विदेश जाने वाले स्टूडेंट की संख्या 2023 के मुकाबले लगभग 2.76 लाख कम थी। वहीं, यह 2021 के मुकाबले अभी भी लगभग 1.74 लाख ज़्यादा थी।
पहला रिकवरी और एक्सपेंशन फेज। छात्र मोबिलिटी 2021 में 4.46 लाख से बढ़कर 2022 में 7.52 लाख हो गई और फिर 2023 में 8.9 लाख को पार कर गई। दूसरा चरण 2024 में शुरू हुआ। यह संख्या आठ लाख से नीचे आ गई और फिर 2025 में और गिरकर 6.19 लाख हो गई। सरकार ने इस क्रम को किसी एक वजह से नहीं जोड़ा है। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करने का फैसला अफोर्डेबिलिटी, फाइनेंस तक पहुंच, विदेशी समाजों के संपर्क में आना और पढ़ाई की किसी खास ब्रांच के लिए एप्टीट्यूड जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है।