Lincoln Scholarship: बिहार की बेटी श्रेया ने जीती 3 करोड़ की लिंकन स्कॉलरशिप, इस साल यह उपलब्धि हासिल करने वाली अकेली भारतीय

Lincoln Scholarship: बिहार की बेटी श्रेया कौशिक को मशहूर लिंकन स्कॉलरशिप के लिए चुना गया है। इस साल इसे पाने वालों में वह अकेली भारतीय हैं। लगभग 3 करोड़ रुपये की यह स्कॉलरशिप अमेरिका के सेंटर कॉलेज में उनकी अंडरग्रेजुएट पढ़ाई में मदद करेगी। आइए जानें

अपडेटेड Jul 17, 2026 पर 2:00 PM
श्रेया का चुना जाना अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक मंच पर भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी है।

Lincoln Scholarship: बिहार के सिवान जिले की श्रेया कौशिक ने साबित किया है कि हिंदुस्तान के बेटे ही नहीं बेटियां भी बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश को गर्व के पल देने का दम रखती हैं। 18 साल की छात्रा श्रेया ने वो उपलब्धि अपने नाम की है, जिसे पाने का सपना देश-दुनिया के ढेरों छात्र देखते हैं। श्रेया को मशहूर लिंकन स्कॉलरशिप के लिए चुना गया है। इस साल इसे पाने वालों में वह अकेली भारतीय हैं। लिंकन स्कॉलरशिप हर साल दुनिया भर के कुछ खास छात्रों को दी जाती है। लगभग 3 करोड़ रुपये की यह स्कॉलरशिप अमेरिका के सेंटर कॉलेज में उनकी अंडरग्रेजुएट पढ़ाई में मदद करेगी।

यह छात्रवृत्ति उन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है, जिन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता (Academic Excellence), नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया हो। इस प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप के लिए श्रेया का चुना जाना अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक मंच पर भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी है।

लिंकन स्कॉलरशिप क्या है?

लिंकन स्कॉलरशिप दुनिया भर में विख्यात स्नातक स्तरीय यानी अंडरग्रेजुएट स्कॉलरशिप है। इसका नाम अमेरिका के 16वें प्रेसिडेंट अब्राहम लिंकन के सम्मान में रखा गया है। हर साल, दुनिया भर से सिर्फ 10 छात्रों को इस प्रोग्राम के लिए चुना जाता है। यह स्कॉलरशिप अमेरिका के केंटकी में सेंटर कॉलेज में चार साल की बैचलर डिग्री के लिए पूरी वित्तीय सहायता प्रदान करती है। प्रोग्राम के मुताबिक, यह स्कॉलरशिप उन स्टूडेंट्स को दी जाती है जिन्होंने बहुत अच्छा एकेडमिक परफॉर्मेंस, लीडरशिप एबिलिटी और समाज में पॉजिटिव योगदान देने की क्षमता दिखाई हो।

कौन हैं लिंकन स्कॉलरशिप जीतने वाली श्रेया कौशिक?

श्रेया का जन्म बिहार के सिवान में हुआ था और बाद में उन्होंने सर्वोदय कन्या विद्यालय, आया नगर, नई दिल्ली से अपनी स्कूलिंग पूरी की। 13 साल की उम्र में, वह डेक्सटेरिटी ग्लोबल से जुड़ गईं, जो एक ऐसी संस्था है जो अलग-अलग बैकग्राउंड के छात्रों को लीडरशिप ट्रेनिंग और शैक्षिक अवसर देता है। उन्होंने प्रोग्राम के जरिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और लीडरशिप इनिशिएटिव में हिस्सा लिया। उनकी अचीवमेंट्स और ओवरऑल प्रोफाइल ने उन्हें लिंकन स्कॉलरशिप के लिए चुने जाने में मदद की।


अपने वक्तव्य में, श्रेया ने कहा कि अब्राहम लिंकन के नाम पर स्कॉलरशिप मिलना एक सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि उन्हें जो मेंटरशिप और ट्रेनिंग मिली, उससे उन्हें अपने हालात से आगे के मौकों को पाने में मदद मिली। उन्होंने समाज में योगदान देने के लिए अपनी एजुकेशन का इस्तेमाल करने का अपना कमिटमेंट भी बताया।

अमेरिका में पढ़ाई का पूरा खर्च कवर करती है स्कॉलरशिप

3 करोड़ रुपये की लिंकन स्कॉलरशिप सेंटर कॉलेज में श्रेया की चार साल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई का पूरा खर्च कवर करेगी। इसमें ट्यूशन फीस, रहने और खाने का खर्च, किताबें, हेल्थ इंश्योरेंस, ट्रैवल का खर्च और पढ़ाई के दूसरे खर्च शामिल हैं। श्रेया को उनके चयन पर बधाई देते हुए, लिंकन स्कॉलर्स प्रोग्राम ने पुष्टि की कि उनकी स्कॉलरशिप पूरे प्रोग्राम में उनकी पढ़ाई में पूरी मदद करेगी। डेक्सटेरिटी ग्लोबल के फाउंडर और सीईओ शरद विवेक सागर ने कहा कि यह कामयाबी दिखाती है कि अच्छी मेंटरशिप और पढ़ाई के मौकों तक पहुंच टैलेंटेड स्टूडेंट्स को दुनिया के बड़े इंस्टीट्यूशन तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकती है।

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