Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2

Lt Kashish Methwani: कशिश मेथवानी ग्लैमर और मॉडलिंग की दुनिया का एक चमकता सितार बन सकती थीं। लेकिन उन्होंने उस दुनिया को अलविदा कहा और देश सेवा की राह पकड़ ली। सीडीएस की परीक्षा दी और पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया। यानी जहां कदम रखा वहां अव्वल आईं

अपडेटेड Jul 10, 2026 पर 5:44 PM
उन्होंने 2024 में सीडीएस परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की।

Lt Kashish Methwani: कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं, वो जहां कदम रखते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी का है। मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया शिखर पर बैठाने के लिए तैयार थी। लेकिन उनके मन में देश सेवा के सपने ने जन्म ले लिया था। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेजेंट्री हमेशा से उनका पैशन रहा, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर कभी नहीं था। उन्होंने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होना वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उनके सपनों को पूरी तरह से बदल दिया।

साल था 2023 का, और मंच मिस इंटरनेशनल इंडिया था। उस पैजेंट में उन्होंने विजेता का ताज अपने सिर पर सजाया। लेकिन कशिश के लिए, मॉडलिंग वो सफर नहीं था, जिस पर चलने के लिए उनके मन में बरसों पहले आस जगी थी। ये बस एक शौक था, जो अब पूरा हो चुका था। अब अगले सफर पर निकलने का समय था। उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास करने पर ध्यान देने का फैसला किया, और वहां भी वह विजेता बनीं। उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2 मिली।

उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला किया और यूनिफॉर्म में सेना जॉइन कर ली। चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में ग्यारह महीने की मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्हें 6 सितंबर को हुई पासिंग आउट परेड में इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। मेथवानी का यह कदम कई लोगों के लिए एक शॉक जैसा था ।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के हवाले से उन्होंने कहा, "रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट की ट्रॉफी लेना, इससे मुझे एक मकसद मिला। यह तय था कि आर्मी ही वह जगह है जहां मैं सच में होना चाहती हूं।" आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में उनकी पोस्टिंग बहुत अहम है क्योंकि यह रेजिमेंट भारत के ऑपरेशन सिंदूर में अहम काम कर रही थी।

लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी कौन हैं?

9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी मेथवानी एक सिंधी परिवार से हैं। बाद में वह पुणे के वाकड में बस गईं, जहा उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही कई एक्स्ट्रा करिकुलर इंटरेस्ट भी किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री पूरी की और फिर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस थीसिस की। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का भी ऑफर मिला, जो उनके शानदार एकेडमिक रिकॉर्ड को और दिखाता है।


परिवार का रोल काफी अहम रहा

लेफ्टिनेंट कशिश के पिता, डॉ. गुरमुख दास, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में सीनियर पोस्ट संभालने से पहले एक साइंटिस्ट के तौर पर काम करते थे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपडी में टीचर थीं। मेथवानी की भरतनाट्यम, डिबेट, एकेडमिक्स, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग जैसी अलग-अलग चीजों में दिलचस्पी रही है। सेना में शामिल होने से पहले, मेथवानी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज नाम का एक एनजीओ भी शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को अपना खून, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

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