बिहार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय पर 25 लाख घूस लेने का आरोप! विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने फोड़ा बम

इस घूसकांड के पीछे PK ने एक बड़ा कारण भी बताया। उन्होंने कहा, "दिलीप जायसवाल का किशनगंज में MGM मेडिकल कॉलेज के पास 2019 तक डिग्री देने का अधिकार नहीं था, लेकिन उसी साल इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह दर्जा घूस के बदले दिया गया

अपडेटेड Aug 08, 2025 पर 3:31 PM
बिहार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय पर 25 लाख घुस लेने का आरोप! विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने फोड़ा बम

बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी घमासान तेज हो गया है। जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने BJP के दो बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से 25 लाख रुपए की रिश्वत ली थी।

प्रशांत किशोर ने गुरुवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस 'घूसकांड' का खुलासा किया है। उन्होंने बताया, "यह पैसा मंगल पांडेय ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर 6 में एक फ्लैट खरीदने के लिए इस्तेमाल किया है। यह फ्लैट उनकी पत्नी उर्मिला पांडेय के नाम पर 86 लाख रुपए में खरीदा गया।" PK ने दस्तावेज दिखाकर कहा कि यह रकम जायसवाल के बैंक खाते से मंगल पांडेय के पिता अवधेश पांडेय के खाते में ट्रांसफर हुई, और फिर वह पैसा उर्मिला पांडेय के अकाउंट में भेजा गया।

प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि फ्लैट के रजिस्ट्री दस्तावेजों में दिलीप जायसवाल खुद गवाह बने हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा बिहार कोरोना महामारी से जूझ रहा था, तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली में फ्लैट खरीदने में व्यस्त थे।


इस घूसकांड के पीछे PK ने एक बड़ा कारण भी बताया। उन्होंने कहा, "दिलीप जायसवाल का किशनगंज में MGM मेडिकल कॉलेज के पास 2019 तक डिग्री देने का अधिकार नहीं था, लेकिन उसी साल इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह दर्जा घूस के बदले दिया गया।

प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा, "यह पहली बार है, जब एक भाजपा नेता, दूसरे भाजपा नेता को घूस दे रहा है। अब यह पार्टी सिर्फ जनता को नहीं, बल्कि अपने नेताओं को भी लूट रही है।"

PK ने लगाए एंबुलेंस घोटाले के भी आरोप

इसके साथ ही उन्होंने एंबुलेंस घोटाले का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि दो साल दो बार खरीदी गईं एंबुलेंस की कीमतों में इतना अंतर कैसे आ गया है?

उन्होंने कहा, "जरा देखिए कि बिहार सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के साथ किस तरह समझौता किया है। भारत सरकार ने टाइप C और D एम्बुलेंस में दी जाने वाली सुविधाओं का मानकीकरण किया है। 2022 में, बिहार सरकार ने 1000 एम्बुलेंस खरीदने का टेंडर दिया और 467 टाइप C एम्बुलेंस खरीदे गए। हर एक एंबुलेंस की कीमत लगभग 19.5 लाख है... टेंडर टाटा मोटर्स और फोर्स मोटर्स को दिए गए। दो साल बाद, 222 और एंबुलेंस खरीदे गए। अब, मंगल पांडे बिहार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनके मंत्रालय में, सिर्फ दो साल में ही एंबुलेंस की कीमत लगभग 27 लाख पहुंच गई। यानी हर एक एम्बुलेंस पर 7 लाख की कीमत बढ़ा दी गई। ये कैसे हुआ?"

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