भारत के महान संगीतकार ए.आर. रहमान आज अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं। 6 जनवरी 1967 को चेन्नई (तब मद्रास) में जन्मे रहमान का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बचपन में ही पिता आर.के. शेखर के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। महज 11 साल की उम्र में रहमान ने विज्ञापन जिंगल्स और छोटे-मोटे काम करके घर चलाने की जिम्मेदारी उठाई। यही कठिन दौर उनके भीतर संगीत के प्रति अनुशासन और धैर्य की नींव बना गया।
शुरुआती संघर्ष और संगीत की नींव
रहमान का बचपन दर्द और मेहनत से भरा था। पिता आर.के. शेखर, तमिल सिनेमा के मशहूर संगीतकार, के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। किशोरावस्था में ही स्कूल छोड़कर उन्होंने कीबोर्ड बजाना शुरू किया और इलैयाराजा जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने साउंड डिजाइन, ऑर्केस्ट्रेशन और म्यूजिक टेक्नोलॉजी सीखी। मद्रास के छोटे से स्टूडियो में घंटों रियाज करते हुए उन्होंने धैर्य और अनुशासन की मिसाल कायम की। 1989 में इस्लाम अपनाने के बाद उनका नाम ए.आर. रहमान पड़ा, जो 'अल्लाह रक्खा' का प्रतीक बना।
कैसे बने ग्लोबल म्यूजिक आइकन
Slumdog Millionaire से वैश्विक विजय
रहमान ने बॉर्डर्स लांघकर 'बॉम्बे ड्रीम्स' और 'लॉर्ड्स ऑफ द रिंग्स' जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया। लेकिन 2008 की 'स्लमडॉग मिलियनेयर' ने इतिहास रच दिया था। 'जय हो' और ओरिजिनल स्कोर के लिए 2009 में दो अकादमी अवॉर्ड्स जीते, जिससे वे पहले एशियाई स्टार बन गए। गोल्डन ग्लोब और BAFTA भी उनके नाम आ गए।
आज भी चेन्नई के KM म्यूजिक स्टूडियो में युवा कलाकारों को ट्रेनिंग देते रहमान आस्था, अनुशासन और विनम्रता से प्रेरित हैं। छह नेशनल अवॉर्ड्स, पद्म भूषण और ग्रैमी जैसे सम्मान उनके नाम हैं। उनकी विरासत सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाना है।