Anupam Kher: अनुपम खेर ने आदित्य धर की 'धुरंधर' को बताया मील का पत्थर, कहा- 'शोले और DDLJ के बाद अब सिनेमा फिर बदलेगा'

Anupam Kher: मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में अनुपम खेर ने दर्शकों के बदलते टेस्ट, पेन इंडिया स्टोरी कहने के तरीके और धुरंधर को खास बनाने वाली बातों के बारे में खुलकर बात की।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 5:26 PM
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अनुपम खेर ने कहा कि शोले से पहले भारतीय सिनेमा एक ही तरह का था। फिर शोले ने सब कुछ बदल दिया। उसके बाद 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' एक और मील का पत्थर साबित हुई। अब 'धुरंधर' है। यह तय करेगी कि आगे फिल्में कैसे बनेंगी।

Anupam Kher: दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर अपने नए म्यूजिक ड्रामे 'जाने पहचाने अनजाने' के लिए दिल्ली में हैं। हाल में हुई एक्टर से चिट-चैट में उन्होंने कहा ​​है कि हिंदी सिनेमा इम्पोर्टेंट मोड़ पर खड़ा है। दिग्गज अभिनेता के अनुसार, आदित्य धर की निर्देशित फिल्म 'धुरंधर' वह फिल्म बन गई है, जो मुख्यधारा की भारतीय कहानी कहने के तरीके को नया आकार देगी।

मनीकंट्रोल के साथ एक चिट चैट में, अनुपम खेर ने दर्शकों के बदलते व्यवहार, पेन इंडिया स्टोरी कहने के तरीके और धुरंधर को खास बनाने वाली बातों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि क्यों प्रामाणिकता पर आधारित फिल्में आज सिनेमाघरों में सबसे बड़ी सफलता हासिल कर रही हैं। अपने चार दशक के करियर में कई बदलावों को देख चुके अनुपम खेर ने कहा कि आज के दर्शक कहीं अधिक चुनिंदा हो गए हैं, क्योंकि उनके पास विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं।

अनुपम खेर ने कहा कि आज मनोरंजन के इतने सारे साधन उपलब्ध हैं। पहले, खासकर 80 और 90 के दशक में, सिनेमा रॉयल होता था और दर्शक उस दुनिया को पसंद करते थे। आज फिल्म निर्माता यथार्थवाद लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यथार्थवाद में भी रॉयलटी की जरूरत होती है। बातचीत के दौरान अनुपम खेर ने कहा कि हिंदी सिनेमा के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में ऐसी मौलिक कहानियां खोजना है, जो पश्चिम की नकल करने के बजाय भारत से जुड़ी हों।


उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदी सिनेमा को बेहतर पटकथाओं की जरूरत है। इसे क्षेत्रीय सिनेमा पर ध्यान देना चाहिए, हालांकि सच कहें तो अब यह क्षेत्रीय सिनेमा नहीं रहा, यह पेन इंडिया सिनेमा है। भारत में हमारे पास अविश्वसनीय रूप से मौलिक और जमीनी कहानियां हैं। अभिनेता ने आगे कहा कि बॉलीवुड का 'कूल' दिखने का जुनून कई फिल्मों को वास्तविक कहानी कहने से दूर कर रहा है।

खेर ने कहा कि कभी-कभी हिंदी सिनेमा अभी भी पश्चिमी सिनेमा की नकल करने की कोशिश करता है। कूल दिखने की यह चिंता अनावश्यक है। लोग ईमानदारी से जुड़ते हैं। पंचायत जैसी कहानियों और कई सफल ओटीटी शो को देखिए, दर्शक जमीनी हकीकत से जुड़ी कहानियों को पसंद करते है।

रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म 'धुरंधर' के बारे में बात करते हुए अनुपम खेर ने कहा कि उनका मानना ​​है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक नया मानदंड बन गई है। उन्होंने कहा, “धुरंधर की सफलता का राज इसकी बिल्कुल मौलिक प्रस्तुति थी। इसमें भरपूर जोश, बेहतरीन विषयवस्तु, शानदार अभिनय, बेहतरीन संगीत और सबसे बढ़कर, सच्चाई थी। दर्शकों ने हाल के सालों में इन वास्तविकताओं को अपनी आंखों के सामने आते देखा था, और निर्देशक आदित्य धर ने जिस तरह से इन्हें प्रस्तुत किया वह अद्भुत था।

अनुपम खेर ने आगे कहा कि शोले से पहले भारतीय सिनेमा एक ही तरह का था। फिर शोले ने सब कुछ बदल दिया। उसके बाद 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' एक और मील का पत्थर साबित हुई। अब 'धुरंधर' है। यह तय करेगी कि आगे फिल्में कैसे बनेंगी।

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