Archana Puran Singh: परमीत सेठी के साथ अपनी शादी में आए मुश्किल दौर को याद करते हुए अर्चना पूरन सिंह की आंखे भर आईं। उन्होंने अपनी शादी में आए उतार चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की है। अर्चना ने बताया कि कैसे उनके पति के साथ उनके अहंकार का लगातार टकराव सब बर्बाद करता जा रहा था। लेकिन उन्होंने बताया कि ध्यान करने के बाद उन्होंने अपने मतभेद को टाइम रहते सुलझा लिया था।
अपने बेटे आर्यमान सेठी के व्लॉग पर बात करते हुए अर्चना ने कहा, 'परमीत और मैं अपनी शादी के एक बहुत ही मुश्किल दौर से उबर चुके हैं। हमने एक-दूसरे को समझने में बहुत गलतियां कीं थी। हमारे बीच कभी-कभी अहंकार आ जाता है। जब शादी में दोनों लोग कमजोर पड़ जाते हैं, तो उस शादी में संघर्ष होना शुरू हो जाता है।
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि तुम उस समय बहुत छोटे थे, लेकिन उस समय भी मुझे पता था कि मेरे बच्चों के पास हमेशा उनके पिता होने चाहिए। मुझे पता था कि परमीत से बेहतर पिता कोई और नहीं हो सकता है। कोई ऐसा व्यक्ति जिसने तुम दोनों को मुझसे ज्यादा प्यार अगर किया है, वह परमीत है। इस टाइम मैंने मन ही मन सोचा था कि मैं इस शादी को टूटने नहीं दूंगी।
अर्चना पूरन सिंह ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से जुड़ने के बारे में भी खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे मेडीटेशन ने उनकी शादीशुदा जिंदगी की परेशानियों से निकलने में उनकी मदद की है। बाद में, उन्होंने परमीत को भी ध्यान करने के लिए मोटीवेट किया। चिट चैट करते हुए अर्चना ने कहा कि ध्यान के जरिए ही उन्हें उस सदमे से उबरने में बहुत मदद मिली थी।
एक्ट्रेस ने बताया कि जब उनकी मां उन्हें 10 महीने की उम्र में 10 दिनों के लिए छोड़कर चली गई थीं, तो वह परेशान हो गईं थी। उन्होंने यह भी बताया कि उसी सेशन के दौरान, परमीत भी अपनी बहन की अचानक मृत्यु के सदमे से निकले । अपने पिछले दुखों को दूर करने से उन्हें अपने रिश्ते को फिर से खुशहाल बनाने में बहुत ज्यादा मदद मेडीटेशन ने की है।
अर्चना ने याद किया कि कैसे लंदन के बोर्डिंग स्कूल में आर्यमान का पैर बुरी तरह से टूट गया था। इस चोट ने उसके सपने को तोड़ दिया था। लेकिन उन्होंने यहां जिस 'सपने' की बात की थी, उसे खुलकर नहीं बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे पता था कि इस टूटे पैर के साथ तुम्हारा सपना भी टूट गया है। उस समय तुम टूट गए थे।
तब से लेकर अब तक, तुम बहुत कुछ झेल चुके हो मैं जानती हूं। लोग इस बात से हमेशा से अनजान रहे हैं। वे तुम्हें हंसते हुए देखते हैं, लेकिन तुमने उस कॉमेडी के पीछे का दर्द सबसे छुपा रखा है।' आर्यमान के डिप्रेशन से गुजरने के बारे में बात करते हुए, मॉमी अर्चना ने कहा, 'तुमने उस समय अंधेरा ढूंढते थे, मैंने तुम्हारी आंखों से खुशी को गायब होते देखा है। उस समय तुम डिप्रेशन में जा चुके थे।
अर्चना ने यह भी बताया कि आर्यमान एक साल तक अपने कमरे से बाहर नहीं आया था। अपने कमरे में बैठे रहते थे और मैं दिनों की नहीं महीनों की बात कर रही हूं। यहां तक कि एक साल तक भी तुम कमरे से नहीं निकले। तुम्हें लगता था कि तुम इस कमरे से बाहर कभी नहीं जा पाओगे। मुझे भी लगने लगा था कि मेरा बेटा कमरे से बाहर नहीं आ पाएगा। लेकिन वह एक साल मैंने तुम्हें दिया और मैंने सुनिश्चित किया कि तुम फिर से खुश हो। मैं भी उतनी ही दुखी थी, जितने की तुम थे।'
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