Baby Do Die Do Review: क्राइम, सस्पेंस और इमोशन से भरपूर है 'बी डू डाई डू' , हुमा कुरैशी का कतिलाना अंदाज जीत लेगा दिल

Baby Do Die Do Review: हुमा कुरैशी स्टारर फिल्म बेबी डू डाई डू सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। अगर इस वीकेंड आप फिल्म को देखने का प्लान कर रहे हैं तो एक बार इस रिव्यू को जरूर पढ़ लें।

अपडेटेड Jul 03, 2026 पर 9:58 AM
फिल्म में हुमा कुरैशी के साथ सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह नजर आए हैं।

फिल्म- बेबी डू डाई डू

कलाकार- हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह

निर्देशक- नचिकेत सामंत

निर्माता- साकिब सलीम

रेटिंग- 3.5/5


Baby Do Die Do Review: क्राइम थ्रिलर फिल्मों में अक्सर बदले की कहानी देखने को मिलती है, लेकिन ‘बेबी डू डाई डू’ उसी पुराने विषय को नए अंदाज में पेश करती है। फिल्म की नायिका न सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है, बल्कि वह बोल और सुन भी नहीं सकती। यही बात इस फिल्म को बाकी थ्रिलर्स से अलग बनाती है। फिल्म में सस्पेंस, एक्शन, रोमांस और डार्क ह्यूमर का बैलेंस्ड मिक्चर देखने को मिलता है।

कहानी

फिल्म की शुरुआत एक दर्दनाक हादसे से होती है। बचपन में बेबी और उसकी जुड़वा बहन एक सुनसान होटल में एक मर्डर देख लेती हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराधी बेबी की बहन की जान ले लेता है। इस घटना के बाद बेबी का पूरा जीवन बदल जाता है।

वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन जाती है और पीएम जैन के मार्गदर्शन में सुपारी किलर के रूप में काम करने लगती है। उसकी पहचान उसका अलग अंदाज है, जिसमें वह छाते को हथियार बनाकर अपने टारगेट खत्म करती है। हालांकि उसके लिए हर हत्या सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि अपनी बहन के कातिल तक पहुंचने का रास्ता भी है। कहानी आगे बढ़ते हुए कई ट्विस्ट लेकर आती है और क्लाइमेक्स तक दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।

अभिनय

हुमा कुरैशी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिना संवादों के अभिनय करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए हर भावना को बखूबी दर्शाया है। बदले की आग, प्रोफेशनल किलर की ठंडक और निजी रिश्तों की संवेदनाएं- तीनों रूपों में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है।

सिकंदर खेर ने अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। चंकी पांडे अपने अलग अंदाज से चौंकाते हैं, जबकि सीमा पाहवा अपने अनुभव के दम पर हर दृश्य को विश्वसनीय बनाती हैं। विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें इमोशनल लेयर भी जोड़ी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले तेज है और कहानी बिना भटके आगे बढ़ती है। डार्क ह्यूमर और सस्पेंस का इस्तेमाल भी संतुलित तरीके से किया गया है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के माहौल को प्रभावी ढंग से पेश करती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है और एक्शन सीक्वेंस स्टाइलिश लगते हैं। एडिटिंग की वजह से फिल्म कहीं भी जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस नहीं होती।

फाइनल वर्डिक्ट

‘बेबी डू डाई डू’ एक प्रयोगधर्मी और मनोरंजक क्राइम थ्रिलर है, जो अपनी कहानी, सस्पेंस और दमदार परफॉर्मेंस की वजह से अलग पहचान बनाती है। हुमा कुरैशी का अभिनय इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है, जबकि फिल्म का अनएक्सपेक्टेड क्लाइमेक्स इसे यादगार बनाता है। अगर आप कुछ नया और रोमांच से भरपूर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

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