हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज हैं जहां एक अभिनेता के इनकार ने दूसरे कलाकार की किस्मत बदल दी। ऐसी ही एक अनसुनी कहानी सुपरस्टार राजेश खन्ना और दिग्गज अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार से जुड़ी है। करीब 61 साल पहले आई फिल्म 'शहीद' (1965) आज भी देशभक्ति फिल्मों के लिए एक मिसाल मानी जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म का एक अहम हिस्सा 'काका' यानी राजेश खन्ना बनने वाले थे।
सुखदेव के रोल के लिए पहली पसंद थे राजेश खन्ना
मनोज कुमार अपनी इस कल्ट क्लासिक फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित थे। फिल्म में उन्होंने खुद 'शहीद भगत सिंह' की भूमिका निभाई थी। फिल्म के अन्य महत्वपूर्ण किरदार 'सुखदेव' के लिए उनकी पहली पसंद राजेश खन्ना थे। उस समय राजेश खन्ना इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे थे और मनोज कुमार को लगा कि उनकी ऊर्जा इस किरदार के लिए एकदम सटीक रहेगी। हालांकि, जब ऑफर राजेश खन्ना के पास पहुँचा, तो उन्होंने इसे विनम्रता से ठुकरा दिया।
राजेश खन्ना द्वारा फिल्म ठुकराने के पीछे की वजह काफी दिलचस्प थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजेश खन्ना उस समय अपनी 'रोमांटिक हीरो' वाली छवि को लेकर बहुत सतर्क थे। 'सुखदेव' का किरदार थोड़ा गंभीर और ग्रे-शेड लिए हुए था। राजेश खन्ना को डर था कि कहीं इस तरह का किरदार निभाने से उनकी चॉकलेट बॉय और हीरो वाली इमेज पर बुरा असर न पड़े। इसी इमेज को बचाने के चक्कर में उन्होंने इस ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा बनने से मना कर दिया।
प्रेम चोपड़ा के लिए 'मील का पत्थर' साबित हुई फिल्म
राजेश खन्ना के इनकार के बाद यह रोल मशहूर विलेन प्रेम चोपड़ा की झोली में जा गिरा। प्रेम चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और 'सुखदेव' के किरदार में अपनी पूरी जान झोंक दी। फिल्म रिलीज हुई और जबरदस्त ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म ने प्रेम चोपड़ा के करियर को वो उड़ान दी, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद उन्हें फिल्मों के ढेरों ऑफर मिलने लगे और वे बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित विलेन बन गए।
1965 की सबसे बड़ी हिट थी 'शहीद'
मनोज कुमार की यह फिल्म न केवल देशभक्ति के जज्बे से भरी थी, बल्कि कमाई के मामले में भी इसने रिकॉर्ड बनाए थे। शहीद को आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन क्रांतिकारी फिल्मों में गिना जाता है। अगर राजेश खन्ना ने उस समय अपनी इमेज की चिंता न की होती, तो शायद आज फिल्म इतिहास की यह तस्वीर कुछ और ही होती। पर कहते हैं न, 'किसी का नुकसान, किसी और के लिए वरदान बन जाता है', और यही प्रेम चोपड़ा के साथ भी हुआ।