Cinema Ka Flashback: जब विद्या बालन को कह दिया गया था 'मनहूस', 12 फिल्मों से हाथ धोकर ऐसे बनीं बॉलीवुड की 'शेरनी'

Cinema Ka Flashback: विद्या बालन आज बॉलीवुड की उन चुनिंदा एक्ट्रेसेज में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी दमदार परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीता। लेकिन करियर की शुरुआत में उन्हें ऐसा झटका लगा, जिसने कई रातों की नींद उड़ा दी। 2000 में उनकी पहली मलयालम फिल्म 'चक्रम' के रिलीज न होने के बाद साउथ के डायरेक्टर्स ने उन्हें 'अशुभ' करार दे दिया

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 5:17 PM
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फिल्म इंडस्ट्री की चमक-धमक के पीछे अक्सर अंधेरे गलियारे होते हैं, जहां कलाकार को अपनी काबिलियत साबित करने से पहले अपनी किस्मत की अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है। विद्या बालन को बॉलीवुड की सबसे सशक्त और 'पावरहाउस' एक्ट्रेस के रूप में जानते हैं, उनके करियर की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। हाल ही में उनके शुरुआती संघर्षों की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बताती है कि सफलता का स्वाद चखने से पहले उन्होंने अपमान का कितना कड़वा घूंट पिया था।

'चक्रम' और वह एक मनहूस ठप्पा

कहानी शुरू होती है दक्षिण भारतीय सिनेमा से, जहां विद्या बालन को सुपरस्टार मोहनलाल के साथ फिल्म 'चक्रम' के लिए चुना गया था। किसी भी नवागंतुक के लिए यह एक सपने जैसा मौका था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कुछ रचनात्मक मतभेदों के कारण फिल्म बंद (shelved) हो गई। हैरानी की बात यह रही कि फिल्म बंद होने का ठीकरा पूरी तरह से विद्या पर फोड़ दिया गया।


साउथ के निर्देशकों और निर्माताओं ने उन्हें 'शापित' (Jinxed) और 'मनहूस' करार दे दिया। यह अंधविश्वास इस कदर फैला कि देखते ही देखते उनके हाथ में मौजूद 10 से 12 फिल्में उनसे छीन ली गईं। बिना किसी नोटिस के उन्हें प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि लोगों को लगने लगा था कि उनके पैर फिल्म के लिए 'अशुभ' हैं।

जब आईने से होने लगी थी नफरत

विद्या ने एक इंटरव्यू में साझा किया कि यह दौर उनके लिए मानसिक रूप से तोड़ देने वाला था। एक निर्माता ने तो उनके माता-पिता के सामने ही उनकी शक्ल पर सवाल उठाते हुए कह दिया था कि, "ये कहीं से हीरोइन लगती है?" इन कड़वी बातों ने विद्या के आत्मविश्वास को इस कदर कुचल दिया था कि उन्होंने अगले छह महीनों तक खुद को आईने में देखना छोड़ दिया था। उन्हें लगने लगा था कि शायद वे वाकई इस इंडस्ट्री के लायक नहीं हैं।

परिवार का साथ और 'परिणीता' का उदय

इस मुश्किल घड़ी में विद्या की बड़ी बहन प्रिया उनके लिए ढाल बनकर खड़ी हुईं। उन्होंने विद्या को याद दिलाया कि अमिताभ बच्चन और तब्बू जैसे दिग्गजों को भी शुरुआत में भारी रिजेक्शन्स झेलने पड़े थे। परिवार के इसी भरोसे ने विद्या को टूटने नहीं दिया।

आखिरकार, साल 2005 में प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' के जरिए विद्या ने बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म ने न केवल उनकी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया, बल्कि उन तमाम लोगों के मुंह पर तमाचा जड़ा जिन्होंने उन्हें 'शापित' कहा था। इसके बाद 'द डर्टी पिक्चर', 'कहानी' और 'शेरनी' जैसी फिल्मों के साथ विद्या ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी 'सितारे' या 'किस्मत' की मोहताज नहीं, बल्कि अटूट मेहनत और टैलेंट की दासी होती है।

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