Comedian Madhur Virli:'370 की बिरयानी' कॉन्ट्रोवर्सी के बीच स्पॉट लाइट में कॉमेडियन मधुर विरली, 'रेप जोक' सुन लोग दे रहे गालियां

Comedian Madhur Virli: कॉमेडियन मधुर विरली बड़ी मुश्किल में पड़ गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे 'रेप' पर 'मज़ाक' करते दिख रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे '₹370 बिरयानी' कमेंट से कंपेयर करना शुरू कर दिया है।

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 4:02 PM
विरली का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह रेप के बारे में एक असंवेदनशील और आपत्तिजनक मज़ाक करते हुए दिख रहे हैं।

Comedian Madhur Virli: कॉमेडियन प्रणित मोरे के हिसाब से जो एक मामूली "मज़ेदार वीडियो" होना चाहिए था, वह कॉन्ट्रोवर्सी में बदल गया। देश में अभी हर तरफ़ '370 की बिरयानी' वाले विवाद की ही चर्चा हो रही है। इसी बीच, कॉमेडियन मधुर विरली भी इस विवाद में शामिल हो गए हैं। यह विवाद एक ऐसे "मज़ाक" को लेकर है जो "शायद मज़ेदार" से ज्यादा "संवेदनहीन" था।

विरली का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह रेप के बारे में एक असंवेदनशील और आपत्तिजनक मज़ाक करते हुए दिख रहे हैं। लोग इस स्टैंड-अप क्लिप को शेयर कर रहे हैं और ऐसी "कॉमेडी" के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्या कहा यहा सुनिए...

एक यूज़र ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "मधुर विरली से मिलिए। रेप पर मज़ाक करना कब से आम बात हो गई? अगर आप किसी के सबसे बुरे सदमे (trauma) का मज़ाक उड़ाए बिना लोगों को हंसा नहीं सकते, तो शायद कॉमेडी आपके लिए नहीं है। सस्ते मज़ाक के लिए दर्द और तकलीफ़ का इस्तेमाल करने के बजाय कोई ईमानदार काम ढूंढिए। और भी शर्मनाक बात यह है कि वहां बैठी ऑडियंस इस सस्ती कॉमेडी पर हंस रही है और हो सकता है कि उनमें कुछ लड़कियां भी हों।"


यह पोस्ट X (पहले ट्विटर) पर ‘sachya2002’ हैंडल से शेयर किया गया था। पोस्ट आज शेयर किया गया और इसे 3 हज़ार लोगों ने देखा। एक यूज़र ने कहा "मधुर विरली, तुम्हें शर्म आनी चाहिए! रेप के बारे में मज़ाक? और वो घटिया ऑडियंस जो तालियां बजा रही थी। इंसान हर दिन साबित कर रहे हैं कि वे सबसे बुरे लोग हैं। एक और यूज़र ने कहा, "कृपया इस घटिया इंसान मधुर विरली द्वारा रेप पीड़ितों पर किए गए इस असंवेदनशील 'मज़ाक' का संज्ञान लें।"

एक और व्यक्ति ने कहा, “क्या? यह कॉमेडी नहीं है, यह ‘आर्ट’ के नाम पर संवेदनहीनता है। वे सबसे भयानक गंदे कामों का मज़ाक उड़ाते हैं। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बेचते हैं।” एक और ने कहा, “जब समझदार होने से ज़्यादा ज़रूरी ‘कूल’ दिखना हो जाए। यह घिनौना है।” एक और व्यक्ति ने कहा, “ऐसा क्यों लगता है कि कुछ लोग अलग-अलग मीडिया के ज़रिए रेप को मामूली बताकर उसे सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं?”

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