Govinda: 'बहू की तरह निभाओ जिम्मेदारी', गोविंदा ने बताया कैसे मां करवाती थीं उनसे रोजाना घर के काम

Govinda: बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर वन’ गोविंदा ने अपने करियर में जितनी चमक बिखेरी है, उतनी ही दिलचस्प उनकी निजी जिंदगी की कहानियां भी रही हैं। एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा ने बताया था कि उनकी मां ने उन्हें बचपन में घर के कामकाज इस तरह करवाए जैसे कोई बहू करती है।

अपडेटेड Jan 01, 2026 पर 10:41 PM
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गोविंदा की मां ने उन्हें हमेशा सिर्फ स्टार बेटा नहीं, बल्कि जिम्मेदार इंसान बनाना चाहती थीं। बचपन से ही वे घर के लाडले थे, लेकिन मां ने उन्हें रोजमर्रा के सारे काम सिखाए झाड़ू-पोंछा, बर्तन मांजना, छोटे-मोटे घरेलू काम, सब कुछ। गांव के लोग अकसर मजाक में कहते थे कि मां उन्हें बेटे की बजाय बहू की तरह रखती हैं, और यही बात आज अभिनेता मुस्कुराकर याद करते हैं।

मां के साथ अनोखा रिश्ता

गोविंदा ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया कि वे अपनी मां के बेहद करीब थे और उनकी हर बात बिना सवाल माने लेते थे। मां रोज उनसे घर का काम करवाती थीं और वे इसे कभी बोझ नहीं, बल्कि उनके प्यार और परवरिश का हिस्सा मानते थे। गांव वाले यह देखकर चिढ़ाते भी थे कि मां उन्हें बहू की तरह रखती हैं, लेकिन इसी ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा।


लोकल ट्रेन का यादगार किस्सा

अपने संघर्ष के दिनों में गोविंदा आम लोगों की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन से सफर करते थे, जिसे वे शहर की धड़कन मानते हैं। पहली बार जब वे चर्चगेट गए, भीड़ भरी ट्रेन में चढ़ते हुए उनका संतुलन बिगड़ा और वे गिर पड़े। यह घटना उनके लिए आम थी, लेकिन मां घबरा गईं और जोर-जोर से चिल्लाने लगीं – “मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!”, तो स्टेशन पर लोगों को लगा कोई छोटा बच्चा खो गया है।

भीड़ में भी ‘मेरा बच्चा’

जब लोगों ने पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि गिरने वाला कोई नन्हा बच्चा नहीं, बल्कि लंबा-चौड़ा, ताकतवर जवान लड़का है। गोविंदा हंसते हुए कहते हैं कि उम्र भले ही बढ़ गई हो, पर मां की नजर में वे हमेशा उनका छोटा बच्चा ही रहेंगे। यह किस्सा उनके और मां के रिश्ते की उस गहराई को दिखाता है, जिसमें डांट भी है, जिम्मेदारी भी और बेइंतहा ममता भी।

संघर्ष से सितारों तक

विरार से मुंबई तक का उनका सफर लगभग 21 साल का रहा, जहां सपनों के साथ संघर्ष भी उनके साथी बने। छोटे शहर में पढ़ाई, डांस का शौक और फिर मुंबई आकर कुछ ही महीनों में पहली फिल्म मिल जाना – यह सब उनकी किस्मत और मेहनत दोनों का नतीजा रहा। आज भी जब वे उन दिनों को याद करते हैं, तो लोकल ट्रेन की भीड़, मां की आवाज और शुरुआती संघर्ष उन्हें जिंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ लगते हैं।

यह खुलासा उस दौर की झलक देता है जब परिवार में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई या करियर तक सीमित नहीं रखा जाता था, बल्कि उन्हें हर जिम्मेदारी निभाने की शिक्षा दी जाती थी। गोविंदा की मां ने उन्हें यह सिखाया कि बेटा हो या बेटी, घर के काम सबको करने चाहिए। यही वजह है कि गोविंदा आज भी अपनी मां की सीख को याद करते हैं और मानते हैं कि उनकी सफलता के पीछे मां का अनुशासन और संस्कार सबसे बड़ा कारण है। फैंस ने जब यह किस्सा सुना तो सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने कहा कि यही वजह है कि गोविंदा आज भी इतने जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं।

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