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Homebound: दो यारों की यारी और लॉकडाउन की वो दर्दनाक तस्वीर, नीरज घायवान की 'होमबाउंड' ने हर दिल को छुआ

Homebound: नीरज घायवान की फिल्म होमबाउंड सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि दोस्ती और इंसानियत का ऐसा सिनेमाई एक्सपीरिसंस है जिसने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया। यह फिल्म उस सच्ची घटना से प्रेरित है जिसमें दो दोस्तों की जिंदगियां एक कठिन सफर में हमेशा के लिए बदल गईं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Dec 20, 2025 पर 2:37 PM
Homebound: दो यारों की यारी और लॉकडाउन की वो दर्दनाक तस्वीर, नीरज घायवान की 'होमबाउंड' ने हर दिल को छुआ
होमबाउंड' की सच्ची कहानी जो ऑस्कर तक पहुंची

नीरज घायवान की 'होमबाउंड' बॉलीवुड की उन रेयर फिल्मों में शुमार है, जो दिल को छू लेती है और समाज के आईने में झांकने पर मजबूर कर देती है। यह फिल्म दो गहरे दोस्तों चंदन (विशाल जेठवा) और शोएब (इशान खट्टर) की कहानी बुनती है, जो उत्तर भारत के एक छोटे से गांव देवरी से निकलकर अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने का सपना देखते हैं। पुलिस जॉब पाने की तैयारी में जुटे ये दोनों, जाति-पात और धर्म के भेदभाव से जूझते हुए भी एक-दूसरे का हाथ थामे रहते हैं।

फिल्म की शुरुआत इनके बचपन से होती है, जहां नदी किनारे बैठे दोनों सपनों की उड़ान भरते हैं। चंदन दलित बैकग्राउंड से ताल्लुक रखता है, जो सरनेम छिपाकर नौकरी तलाशता है, तो शोएब मुस्लिम होने की वजह से जॉब में मुश्किलें झेलता है। कॉलेज में चंदन की मुलाकात सुधा (जान्हवी कपूर) से होती है, जो प्यार की एक कोमल कड़ी जोड़ती है। लेकिन एंट्रेंस एग्जाम के रिजल्ट का इंतजार लंबा खिंचता है, और बीच में देशव्यापी लॉकडाउन की मार पड़ती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह फिल्म असल जिंदगी से प्रेरित है। 2020 के लॉकडाउन में अमृत कुमार (चंदन का किरदार) और मोहम्मद सैयूब (शोएब) नाम के दो दोस्तों की सच्ची कहानी पर बनी है, जिनकी वायरल तस्वीर ने न्यूयॉर्क टाइम्स पत्रकार बशरात पीर को प्रेरित किया। न्यूयॉर्क टाइम्स के दिग्गज पत्रकार बशरात पीर की इस कहानी पर हृदयविदारक रिपोर्ट एक सिनेमा शास्त्र की मिसाल बन गई। 2020 में इन दोनों दोस्तो की वायरल तस्वीर पर लिखी स्टोरी ने फिल्ममेकर नीरज घायवान को इतना झकझोर दिया कि उन्होंने अपनी फिल्म 'होमबाउंड' बना डाली।

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