98वें अकादमी अवॉर्ड्स के नामांकन की घोषणा के साथ ही भारतीय सिनेमा को एक और झटका लगा। नीरज घायवान के निर्देशन में बनी फिल्म 'होमबाउंड' बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में फाइनल नॉमिनेशन हासिल नहीं कर सकी। कनाडा और TIFF जैसे अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में सराही गई यह फिल्म शॉर्टलिस्ट तो पहुंची थी, लेकिन अंतिम पांच में जगह नहीं बना पाई। विशाल जेठवा, ईशान खट्टर और जाह्नवी कपूर अभिनीत यह फिल्म धर्मा प्रोडक्शंस का प्रोजेक्ट थी।
फिल्म की कहानी कोविड लॉकडाउन के दौरान सूरत से उत्तर प्रदेश गांव लौटने वाले दो युवाओं की सच्ची घटना पर आधारित है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट से प्रेरित 'होमबाउंड' ने भारत के आधिकारिक प्रवेश के रूप में उम्मीदें जगाई थीं। मार्टिन स्कॉर्सेसे के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर होने से इसकी चर्चा और बढ़ गई थी। करण जौहर ने शॉर्टलिस्टिंग पर भावुक पोस्ट शेयर किया था, लेकिन नामांकन के दिन निराशा हाथ लगी। दुनिया भर से 86 फिल्मों में से 15 शॉर्टलिस्ट हुईं, जिनमें अर्जेंटीना की 'बेलेन', ब्राजील की 'द सीक्रेट एजेंट' और फ्रांस की 'इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट' शामिल रहीं।
भारत का ऑस्कर सफर हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। 'मदर इंडिया' (1957), 'सालाम बॉम्बे' (1988) और 'लगान' (2001) ही बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटगरी में नामांकित हो सकीं। हाल के वर्षों में 'द एलीफेंट व्हिस्परर्स' को डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट और 'आरआरआर' के 'नाटू नाटू' को ओरिजिनल सॉन्ग का ऑस्कर मिला। लेकिन इंटरनेशनल फीचर में लंबे समय से सूखा पड़ा है। 'होमबाउंड' नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद भी क्रिटिक्स की तारीफ बटोर चुकी थी।
फिर भी फिल्ममेकर्स हार नहीं मान रहे हैं। नीरज घायवान की यह कोशिश भारतीय सिनेमा की वैश्विक महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। विशाल जेठवा ने अपनी 'कमला बाई के बेटे' वाली बैकग्राउंड शेयर कर इंस्पायर किया था। नामांकन भले न मिला, लेकिन 'होमबाउंड' ने लॉकडाउन की मानवीय कहानी को दुनिया तक पहुंचाया। भारतीय सिनेमा का संघर्ष जारी रहेगा। 98वें ऑस्कर्स का मुख्य समारोह 8 मार्च 2026 को होगा।