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Moheener Ghoraguli: भारत का पहला रॉक बैंड 'मोहिनर घोड़ागुली', जिसने दर्शकों को दिए कई हिट गाने

Moheener Ghoraguli: रॉक संगीत लगभग हर किसी का पसंदीदा है। यह जेन जी के बीच भी पॉपुलैरिटी हासिल कर रहा है! क्या आप भारत के पहले रॉक बैंड के बारे में जानते हैं?

Manushri Bajpaiअपडेटेड Oct 23, 2025 पर 11:38 AM
Moheener Ghoraguli: भारत का पहला रॉक बैंड 'मोहिनर घोड़ागुली', जिसने दर्शकों को दिए कई हिट गाने
भारत का पहला रॉक बैंड 'मोहिनर घोड़ागुली'

Moheener Ghoraguli: रॉक कल्चर आज की जनरेशन को भी अपनी ओर तेजी से खींच रहा है। रॉक म्यूजिक के युवा दीवाने हो रहे हैं। ये भारत में भी नया नहीं है। रॉक म्यूजिक की बात करें तो 1975 में देश के पहले रॉक बैंड को बनाया गया था। आप भारत के पहले रॉक बैंड के बारे में जानते हैं?

भारत का पहला रॉक बैंड 1975 में कोलकाता में बनाया गया था। गौतम चट्टोपाध्याय के नेतृत्व वाले इस बैंड का नाम मोहिनर घोड़ागुली (जिसका अर्थ है मोहिन के घोड़े) था। मेन म्यूजिशियन गौतम चट्टोपाध्याय (स्वर, मुख्य गिटार, सैक्सोफोन, लोक वाद्ययंत्र, गीत) के अलावा, मोहिनर घोड़ागुली में प्रदीप चटर्जी (बास गिटार, बांसुरी), तापस दास (गीत, स्वर, गिटार), रंजन घोषाल (गीत, एमसी, दृश्य, मीडिया संबंध), बिश्वनाथ (बिशु) चट्टोपाध्याय (ड्रम, बास वायलिन), अब्राहम मजूमदार (पियानो, वायलिन) और तपेश बंदोपाध्याय (स्वर, गिटार) शामिल थे।

बैंड की खासियत थी इसका बंगाली फोक (लोकगीत), बाउल, शहरी अमेरिकी फोक और जैज़ सहित कई प्रकार के गाने। यह बैंड पश्चिमी रॉक संगीत को पारंपरिक बंगाली लोक और बाउल संगीत के साथ मिक्स म्यूजिक देने के लिए जाना जाता था, जिससे एक नई और अनोखे जॉनर का निर्माण हुआ, जिसे अक्सर "बाउल जैज़" कहा जाता है।

'मोहिनीर घोड़ागुली' में गिटार, सैक्सोफोन, ड्रम जैसे विभिन्न प्रकार के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट के साथ-साथ इकतारा, वायलिन, बांसुरी आदि का प्रयोग किया गया था, जिन्हें बंगाली रॉक संगीत में प्रयोग किया गया था। गौतम चटर्जी ने बाउल, रॉक और लैटिन संगीत के टैंगो-साल्सा को मिलाकर संगीत की एक नई दुनिया रच डाली थी। बोलों की विविधता और स्टेज परफॉमेंस के साथ, उन्होंने गानों को एक ऐसा रूप दिया जो सत्तर के दशक के लिए क्रांतिकारी था।

मोहीनर घोरागुली ने अपने गीतों के जरिए सामाजिक मुद्दों, शहरी संस्कृति और कोलकाता में आधुनिक जीवन की परेशानियों के बारे में बात की। उनके गानों को अक्सर 1960 के दशक में बॉब डायलन के नेतृत्व वाले शहरी लोक आंदोलन के समान, व्यक्तिगत और सामाजिक प्रकृति के रूप में पेश किया गया।

उनके एल्बमों का टाइटल "शोंगबिग्नो पाखीकुल ओ कोलकाता बिशायक" (1977), "अजाना उरोंतो बोस्तु बा औ-ऊ-बाव" (1978), "दृश्योमान मोहीनेर घोड़ागुली" (1979), "आबार बोछोर कुरी पोरे" (1995), "झोरा सोमॉयर गान" (1996), और "माया" (1997) हैं।

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