ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मंदाना करीमी ने भारत छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बिग बॉस 9 और लॉक अप जैसे रियलिटी शोज से घर-घर पहचान बनाने वालीं मंदाना ने एक नए वीडियो में खुलासा किया कि सुरक्षा कारणों और अप्राप्त समर्थन के चलते वो देश से जा रही हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उन्होंने ये भावुक बयान दिया।
मंदाना का सफर भारत से जुड़ा रहा है। कम उम्र में मुंबई आकर उन्होंने मॉडलिंग और एक्टिंग में कदम रखा। फिल्मों जैसे 'कलिया' और टीवी शोज ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। यहां उन्होंने शादी भी की, दोस्त बनाए और करियर की नई ऊंचाइयां छुईं। लेकिन अब सब बदल गया। वीडियो में उन्होंने कहा, "मैंने प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया, ईरानी मुद्दों पर आवाज उठाई, लेकिन भारत ने मुझे धोखा दिया। मुझे सुरक्षित नहीं लगता।" मुंबई में दोस्त खोने और अकेलेपन की बातें उनके चेहरे पर साफ झलक रही थीं।
ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच मंदाना की सक्रियता ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी आवाज यहां सुनी नहीं गई। "मेरे बैग पैक हैं, भारत से ब्रेकअप जैसा लग रहा है। ये बहुत दर्दनाक है," उन्होंने इंटरव्यू में रोते हुए बताया। ईरान में बदलाव की उम्मीद में लौटना चाहती हैं, लेकिन 10 साल पुराने बैन की वजह से तुरंत संभव नहीं। फिर भी, भारत में रहना अब उनके लिए जोखिम भरा हो गया। उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी गुस्सा उतारा, कहा कि उनके काम छीन लिए गए।
मंदाना की ये कहानी बॉलीवुड में विदेशी कलाकारों के संघर्ष को उजागर करती है। राजनीतिक बयानों के बाद अलगाव महसूस करना आम नहीं। फैंस हैरान हैं, क्योंकि भारत ने उन्हें अपनाया था। अब वो ईरान की ओर रुख कर रही हैं, जहां तानाशाही खत्म होने की आस बंधी है। उनका ये कदम सवाल खड़ा करता है क्या अभिनेत्रियां अपनी राय रखने की कीमत चुकाएंगी? मंदाना की विदाई उदासीनता भरी है, लेकिन हौसले से भरी। भारत को अलविदा कहते हुए वो नया अध्याय शुरू करने को तैयार।
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ ने उनके दर्द को समझते हुए सहानुभूति जताई, तो कई ने उन्हें ट्रोल किया। यह स्थिति दिखाती है कि ग्लैमर की दुनिया के पीछे कलाकारों की निजी जिंदगी कितनी जटिल और संघर्षपूर्ण हो सकती है।
मंदाना की कहानी उन तमाम प्रवासी कलाकारों की आवाज है जो अपने सपनों की तलाश में घर छोड़ते हैं लेकिन नए देश में खुद को अकेला और असहाय महसूस करते हैं। उनका दर्द हमें याद दिलाता है कि सफलता की चमक के पीछे भावनात्मक संघर्ष और अकेलापन भी होता है, जिसे अक्सर दुनिया नहीं देख पाती।