Javed Akhtar: दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर अपनी राय खुलकर व्यक्त करने से कभी नहीं कतराते। हाल ही में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जब एक सोशल मीडिया यूजर ने उनके धर्म पर कमेंट किया, तो अख्तर ने पलटवार करते हुए कहा कि वह नास्तिक हैं।
जावेद अख्तर की ट्रंप विरोधी पोस्ट पर एक प्रशंसक ने कमेंट करते हुए कहा, “सर, आपकी कौम के भी झूठ के लिए एक शेर है मेरे पास... ‘जानते हैं हम जन्नत के हूरों की हकीकत, दिल के बहलाने के लिए ये ख्याल भी अच्छा है’। इसके जवाब में अख्तर ने कहा कि अगर आपका छोटा और कमज़ोर दिमाग़ यह बात समझ सकता है कि मैं एक नास्तिक हूं। तो मुझे मेरी 'क़ौम' के बारे में मत बताइए। मेरी 'क़ौम' सभी भारतीय हैं, जिसमें आप भी शामिल हैं।
सबसे पहली बात, एक आत्मविश्वासी, हाई-प्रोफाइल, लोकप्रिय और सशक्त महिला—जो इटली जैसे महान देश की प्रधानमंत्री हैं, जिसने मिस्टर ट्रंप के देश को संस्कृति, कला, आर्किटेक्चर और बेहतरीन सिनेमा के बारे में इतना कुछ सिखाया है—वह दुनिया के सबसे अलोकप्रिय व्यक्ति के साथ फोटो खिंचवाने के लिए क्यों मिन्नत करेगी? सिर्फ़ बहस के लिए मान भी लें कि ऐसा हुआ था, तो सोचिए कि कितना सस्ता, अभद्र और असभ्य व्यक्ति प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा दावा करेगा।"
जावेद अख्तर भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर लेखकों और गीतकारों में से एक हैं। उन्होंने 'सिलसिला', 'दिल चाहता है', 'लगान', 'कल हो ना हो', 'जब तक है जान' और कई अन्य फिल्मों के यादगार गानों के लिए गीत लिखे हैं। अपने करियर के दौरान, जावेद अख्तर को कई सम्मान मिले हैं, जिनमें उनके गीतों के लिए कई नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स शामिल हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा और साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।