फिल्म-कृष्णा और चिट्ठी
फिल्म-कृष्णा और चिट्ठी
कलाकार-अरुण गोविल, दर्शील सफारी, सज्जाद डेलाफ्रूज़, मीर सरवर, फैज़ खान और विनय भारद्वाज
निर्देशक-विनय भारद्वाज और सौमित्र सिंह
रेटिंग-3.5 स्टार्स
Krishna Aur Chitthi Review: अगर आप ऐसी फिल्मों से थोड़ा ब्रेक चाहते हैं जहां सिर्फ एक्शन, चीख-पुकार और ओवरड्रामैटिक मोमेंट्स हों, तो 'कृष्णा और चिट्ठी' आपके लिए एक अलग एक्सपीरियंस बन सकती है। ये फिल्म धीरे-धीरे खुलती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसका इमोशनल कनेक्शन मजबूत होता जाता है।
फिल्म की कहानी अर्जुन यानी दर्शील सफारी के किरदार के आसपास घूमती है, जो क्रिकेट का जबरदस्त दीवाना है। लेकिन उसकी जिंदगी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। कश्मीर की बैकग्राउंड, परिवार का संघर्ष और रिश्तों की उलझनें उसकी जिंदगी को लगातार प्रभावित करती हैं। तभी एक चिट्ठी उसकी दुनिया बदल देती है। यही चिट्ठी फिल्म का सबसे बड़ा इमोशनल हुक बनती है, जो कहानी को सिर्फ स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं रहने देती।
कहानी ट्रेलर से ही साफ हो गई थी कि अर्जुन क्रिकेट लवर है और उसके पिता की जिंदगी में कुछ ऐसा होता है, जिससे अर्जुन का ये लव ही मदद के लिए आगे आता है। दरअसल एक एमएलए मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लेता है और वहां मॉल बनाना चाहता है लेकिन पंडित जी ऐसा नहीं होने देते, चाहें कुछ भी करना पड़े। ऐसे में कहानी आगे बढ़ती है और क्रिकेट मैच पर सब टिक जाता है। फिर क्या होता है? ये देखने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।
दर्शील सफारी इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका अभिनय काफी नैचुरल लगता है और कई जगह वो सिर्फ एक्सप्रेशंस से सीन पकड़ लेते हैं। अरुण गोविल की एंट्री स्क्रीन पर एक अलग शांति लेकर आती है। वहीं सज्जाद डेलाफ्रूज़ और मीर सरवर कहानी में गंभीरता बनाए रखते हैं।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी अच्छी है। खासकर कश्मीर वाले विजुअल्स स्क्रीन पर खूबसूरत लगते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कई सीन्स को इमोशनली और मजबूत बना देता है। हालांकि फिल्म का सेकंड हाफ थोड़ा स्लो महसूस होता है और कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं। यही वजह है कि फिल्म पूरी तरह एंगेज नहीं रख पाती।
लेकिन अच्छी बात ये है कि फिल्म अपनी भावनाओं में ईमानदार लगती है। ये जबरदस्ती मैसेज देने की कोशिश नहीं करती, बल्कि रिश्तों, भरोसे और उम्मीद की बात शांत तरीके से कहती है। तो अगर आपको कंटेंट बेस्ड, इमोशनल और थोड़ा अलग तरह का सिनेमा पसंद है, तो कृष्णा और चिट्ठी एक बार जरूर देखी जा सकती है। ये परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर लगती है।
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