Krishnamay: भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर सर्च कर काम करने वाली और सही जानकारी दर्शकों तक पहुंचाने वाली संस्था सनातन विजडम एक बार फिर चर्चा में छाई हुई है। इस बार वजह है भगवान श्री कृष्ण के जीवन, उनके पथ और उनके व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव पर केंद्रित डॉक्युमेंट्री सीरीज ‘कृष्णमय’। इसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है। देवऋषि इसका निर्देशन कर रहे हैं।
‘कृष्णमय’ को समझने के लिए पहले ‘सदानीरा’ को जानना जरूरी है। यह भारत की नदियों पर चल रही एक लंबी सर्च-आधारित डॉक्युमेंट्री प्रोजेक्ट है, जिस पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में देश की तमाम प्रमुख नदियों को उनके भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदर्भों में दर्ज किया जा रहा है। देवऋषि की टीम गंगा के उद्गम देवप्रयाग से यह जर्नी शुरू कर चुकी है और अब तक काशी तक पहुंची है। यह सफर अभी बहुत लंबा है।
इसी ‘सदानीरा’ के अंतर्गत एक श्री राम विशेषांक भी अलग से तैयार किया जा रहा है, जिसमें भगवान राम और भारत की नदियों के संबंध को विशेष रूप से दिखाया जाएगा। यह विशेषांक 26 मार्च को रामनवमी के अवसर पर दर्शकों के सामने आने की उम्मीद है।
सदानीरा और राम विशेषांक के समानांतर देवऋषि की लीड में सनातन विजडम के अंतर्गत श्री कृष्ण पथेय पर भी काम चल रहा है और उसी के आधार पर ‘कृष्णमय’ बनाई जा रही है। मथुरा और वृंदावन में शूटिंग पूरी हो चुकी है। श्री कृष्ण की जन्मभूमि और उनकी बाललीलाओं की भूमि को कैमरे में समेट लिया गया है। अब टीम उज्जैन के जनापाव पहुंची है जहां भगवान कृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के सान्निध्य में शिक्षा ली थी। इसके बाद शूटिंग अमझेरा में होगी जो रुक्मिणी हरण की ऐतिहासिक स्मृतियों को सहेजे हुए है। यात्रा का अंतिम पड़ाव होगी द्वारका, भगवान कृष्ण की वह नगरी जहां उन्होंने राजधर्म की नींव रखी।
‘कृष्णमय’ की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह सीरीज केवल श्री कृष्ण के भौगोलिक जीवन-मार्ग तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें कृष्ण के उन तमाम रूपों को उकेरा जाएगा, जिन्हें सदियों से भारत और दुनिया ने अलग-अलग तरह से पहचाना और महसूस किया है। बालकृष्ण से लेकर गीता के उपदेशक तक, मित्र से लेकर महायोगी तक।
इसके साथ ही विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों में कृष्ण की उपस्थिति और प्रभाव को भी इस सीरीज में दर्ज किया जाएगा। भारत के लगभग सभी अंचलों में कृष्ण भक्ति के जो विविध रंग हैं, उनके गीत, उनके डांस, उनकी पूजा-विधियों, सब कुछ इस सीरीज का हिस्सा होंगी। यह भी ‘सदानीरा’ की तरह एक निरंतर विस्तरित होती जाने वाली सीरीज होगी।
‘कृष्णमय’ को सनातन विजडम का सहयोग प्राप्त है। इसका निर्माण देवोति भारत कर रही है जिसकी बागडोर साधना पांडेय के हाथों में है। सीरीज का रचनात्मक निर्देशन और संगीत देवऋषि दे रहे हैं जबकि पूरी परियोजना का कार्यकारी संचालन बम्केश पांडेय संभाल रहे हैं।
देवप्रयाग से काशी तक की जल-यात्रा हो या मथुरा से द्वारका तक का यह कृष्ण-पथ, दोनों मिलकर एक ऐसे सांस्कृतिक अभियान की तस्वीर बनाते हैं जो भारत को उसकी जड़ों की याद दिलाने का काम कर रहा है। ‘कृष्णमय’ उसी अभियान की नई और जरूरी कड़ी है।