बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की चहेती अभिनेत्री मन्नारा चोपड़ा ने हाल ही में अपनी जिंदगी के कठिन पहलुओं पर खुलकर बात की है। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि ग्लैमरस दिखने वाली उनकी जिंदगी हर रोज मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से भरी रहती है। यह कदम युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
वीडियो में मन्नारा जिम में कड़ी मेहनत करती नजर आ रही हैं। चक्रासन, कोर एक्सरसाइज और वेटेड स्क्वॉट्स करते हुए वे पसीना बहा रही हैं। कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'सॉफ्ट हार्ट, स्ट्रॉन्ग स्पाइन। लोग सोचते हैं मेरी जिंदगी आसान है, लेकिन वे नहीं जानते कि मैं रोज कितनी मानसिक लड़ाइयों से जूझती हूं। राजनीति से भरी दुनिया में भी मैं गरिमा और ईमानदारी चुनती हूं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ दिन उन्हें तोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी आत्मा कभी झुकती नहीं। यह बयान फैंस के बीच भावुक प्रतिक्रियाएं ला रहा है।
मन्नारा ने साफ किया कि वे कभी ग्रुपिज्म या गेम खेलने में विश्वास नहीं करतीं। बल्कि कड़ी मेहनत और सच्चाई से आगे बढ़ती हैं। बिग बॉस 17 में सेकंड रनर-अप रह चुकीं मन्नारा का यह खुलासा उनके मजबूत व्यक्तित्व को दर्शाता है। उन्होंने दिसंबर 2025 में क्रिसमस क्लासिक 'लास्ट क्रिसमस' को अपनी आवाज दी थी, जो टेलर स्विफ्ट जैसे सितारों के कवर के बाद चर्चित रहा। सोशल मीडिया पर गाते हुए वीडियो शेयर कर उन्होंने लिखा था, 'इस क्रिसमस मैं आपको अपनी आवाज और दिल दे रही हूं।'
मूल रूप से हरियाणा के अंबाला से ताल्लुक रखने वाली मन्नारा का असली नाम बार्बी हांडा है। फैशन डिजाइनर और असिस्टेंट कोरियोग्राफर रहने के बाद 2014 में तेलुगु फिल्म 'प्रेमा जिश्टम वांछना' से डेब्यू किया। हिंदी, तमिल, कन्नड़ सिनेमा और वेब सीरीज 'भूतमेट' में काम कर चुकीं। अब तेलुगु 'थिरगाबदार सामी' और पंजाबी 'ओही चन्न ओही रातां' में नजर आएंगी। हिप-हॉप व बेली डांस ट्रेनिंग ने उन्हें परफॉर्मर बनाया।
मन्नारा का यह बयान सेलेब्स के मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा को बढ़ावा दे रहा है। फैंस उनकी हिम्मत की सराहना कर रहे हैं, जो साबित करता है कि स्टार्स भी इंसान हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बॉलीवुड में अक्सर सितारे अपनी निजी परेशानियों को छिपाते हैं। ऐसे में मन्नारा का यह कदम न सिर्फ साहसिक है बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत जरूरी है। यह युवाओं और आम लोगों को यह समझाने में मदद करेगा कि मानसिक समस्याएँ सामान्य हैं और उनका समाधान संभव है।