Nana Patekar News: नाना पाटेकर को पर्दे पर आपने गुस्से में दहाड़ते, दुश्मनों को ललकारते और दमदार संवाद बोलते जरूर देखा होगा। लेकिन असल जिंदगी में उनके व्यक्तित्व का एक दूसरा पहलू भी है। हर जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना...। नाना पाटेकर से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने लिए महंगी कार खरीदने के बजाय किसान परिवारों की मदद को प्राथमिकता दी। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म जगत समेत पूरे देश को झकझोर दिया है।
75 साल की उम्र में उन्होंने गुरुवार (8 अक्तूबर) तड़के गोवा स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
₹1.5 करोड़ की कार खरीदने का था प्लान
सितंबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में लेखक रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर से जुड़ा यह किस्सा शेयर किया था। उनके मुताबिक, नाना करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने वाले थे। लेकिन किसानों की परेशानियां और आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की स्थिति देखकर उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, नाना ने कार खरीदने के बजाय उस पैसे को जरूरतमंद किसान परिवारों की मदद में लगाने का फैसला किया।
किसानों का दर्द देखकर शुरू किया था काम
किसानों के लिए नाना पाटेकर के काम की शुरुआत किसी प्रचार अभियान से नहीं हुई थी। 2015 में महाराष्ट्र में सूखे और किसान आत्महत्याओं की खबरों ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। 'NAAM Foundation' के मुताबिक, नाना पाटेकर और मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने सितंबर 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की। इसका उद्देश्य किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की मदद करने के साथ-साथ सूखे और पानी की समस्या से जूझ रहे गांवों के लिए स्थायी समाधान तैयार करना था।
पहले अपनी जेब से दिए करोड़ों रुपये
2016 में दिए एक इंटरव्यू में नाना ने बताया था कि एक किसान की आत्महत्या और उसके परिवार की टीवी पर दिखाई गई स्थिति ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। उन्होंने बताया कि उनके पास उस समय करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये थे। उन्होंने मकरंद अनासपुरे से उन परिवारों तक यह पैसा पहुंचाने को कहा, जिन्होंने अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खो दिया था। लेकिन बाद में नाना को लगा कि सिर्फ आर्थिक मदद करना पर्याप्त नहीं है। किसानों की असली समस्या सूखा, पानी और खेती से जुड़ी परेशानियां हैं। इसी सोच के साथ NAAM Foundation ने पानी संरक्षण, गांवों में जलस्रोतों के पुनर्जीवन और ग्रामीण विकास पर भी काम शुरू किया।
किसानों के आंसू पोंछने वाले नाना
रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर के स्वभाव की तारीफ करते हुए कहा था कि जो व्यक्ति किसानों के आंसू पोंछने के लिए अपनी करोड़ों रुपये की कार छोड़ सकता है। वह किसी का नुकसान नहीं कर सकता। नाना खुद भी खेती से जुड़े हुए थे और फार्म पर रहते थे। किसानों और ग्रामीण परिवारों की परेशानियों को लेकर उनका जुड़ाव केवल दिखावे तक सीमित नहीं था।
फिल्मी पर्दे के 'अंग्री मैन' का यह रूप भी है खास
नाना पाटेकर की पहचान उनकी बेबाकी और गुस्सैल अंदाज के लिए जरूर रही है। लेकिन किसानों के लिए उनका काम उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू दिखाता है। एक तरफ 'क्रांतिवीर', 'परिंदा', 'अब तक छप्पन' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में उन्होंने बेहद तीखे और गंभीर किरदार निभाए। वहीं, दूसरी तरफ वास्तविक जिंदगी में उन्होंने किसानों और ग्रामीण परिवारों की समस्याओं को लेकर जमीन पर काम करने का रास्ता चुना। उनके अभिनय के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।