Rajesh Kumar: "सतीश शाह होते तो सबसे ज्यादा खुश होते..." धुरंधर में राकेश बेदी की कामयाबी को लेकर भावुक हुए राजेश कुमार

Rajesh Kumar: टेलीविजन इंडस्ट्री के कलाकार राजेश कुमार बताते हैं कि 'साराभाई वर्सेस साराभाई' की टीम में कभी प्रतिस्पर्धा नहीं रही। उनके अनुसार, दिग्गज अभिनेता सतीश शाह हमेशा सह-कलाकारों की तरक्की से खुश होते थे और वे राकेश बेदी की सफलता का जश्न मनाने वाले पहले व्यक्ति होते।

अपडेटेड Apr 09, 2026 पर 6:34 PM
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भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित कॉमेडी शोज में से एक 'साराभाई वर्सेस साराभाई' (Sarabhai vs Sarabhai) आज भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह रखता है। इस शो के हर किरदार ने अपनी एक अलग पहचान बनाई, लेकिन इसके कलाकारों के बीच का आपसी रिश्ता हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में, शो में 'रोशेश साराभाई' का किरदार निभाने वाले अभिनेता राजेश कुमार ने एक इंटरव्यू के दौरान शो की कास्ट और उनके बीच के बॉन्ड को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

राकेश बेदी की सफलता और सतीश शाह का रिएक्शन

राजेश कुमार ने अनुभवी अभिनेता राकेश बेदी के किरदार की लोकप्रियता पर बात की। उन्होंने कहा कि अगर आज सतीश शाह (जो शो में इंद्रवदन साराभाई थे) सक्रिय रूप से इस सफलता को देख रहे होते, तो वे राकेश बेदी की उपलब्धि का जश्न मनाने वाले पहले व्यक्ति होते। राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि 'साराभाई' की पूरी टीम के बीच कभी भी ईर्ष्या या 'इनसिक्योरिटी' जैसी भावना नहीं रही। उन्होंने बताया कि कैसे शो के कलाकार एक-दूसरे की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देते थे और एक-दूसरे की सफलता पर गर्व महसूस करते थे।

क्या सतीश शाह को है कोई मलाल?

इंटरव्यू के दौरान जब राजेश से पूछा गया कि क्या सतीश शाह जैसे दिग्गज कलाकार को शो के किसी खास मोड़ या किसी अन्य कलाकार की लाइमलाइट से कोई परेशानी हो सकती है, तो उन्होंने बड़ी सादगी से जवाब दिया। राजेश कुमार ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि सतीश जी के मन में ऐसा कुछ भी होगा। वे एक बहुत बड़े कलाकार हैं और उन्होंने हमेशा नए टैलेंट को सराहा है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि शो की पूरी कास्ट एक परिवार की तरह रही है, जहां हंसी-मजाक के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति गहरा सम्मान भी है।


'साराभाई वर्सेस साराभाई' की विरासत

राजेश कुमार, जो इन दिनों अपनी फिल्म 'बिननी एंड फैमिली' को लेकर भी चर्चा में हैं, ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि 'साराभाई वर्सेस साराभाई' सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक अहसास था। रत्ना पाठक शाह (माया साराभाई) से लेकर सतीश शाह तक, हर किसी ने अपने किरदार को इतनी शिद्दत से जिया कि आज भी लोग उनके डायलॉग्स दोहराते हैं। राकेश बेदी का 'धुरंधर' वाला किरदार भले ही गेस्ट अपीयरेंस जैसा था, लेकिन उसने दर्शकों पर जो छाप छोड़ी, उसकी तारीफ आज भी राजेश कुमार जैसे को-स्टार्स करते नहीं थकते।

कलाकारों के बीच का अनूठा बॉन्ड

राजेश कुमार का यह बयान फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आपसी मतभेदों के बीच एक सकारात्मक संदेश देता है। यह दिखाता है कि जब कलाकार अपने काम के प्रति ईमानदार होते हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तो वे न केवल बेहतरीन शो बनाते हैं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती भी कायम करते हैं जो सालों-साल चलती रहती है।

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