हिंदी सिनेमा में अपनी चमक बिखेरते हुए रानी मुखर्जी ने 30 गौरवशाली साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने दिल की बात साझा की, जिसमें बताया कि फिल्मी दुनिया में कदम रखते वक्त उनके पास कोई तयशुदा रणनीति नहीं थी। यश राज फिल्म्स के इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए नोट में रानी ने कहा कि वो हमेशा खुद को नई लड़की की तरह महसूस करती रहीं, जो कैमरे के सामने पहली बार खड़ी होकर सोचती है क्या ये सही जगह है?
उनकी सफर की शुरुआत 1997 में 'राजा की आएगी बारात' से हुई। रानी ने लिखा, "तब मुझे एक्टिंग से करियर की कल्पना भी नहीं थी। ये मुझे जिंदगी में जीवंत बनाती थी। इस फिल्म ने पहला बड़ा सबक दिया कि सिनेमा सिर्फ ग्लैमर नहीं, जिम्मेदारी है। महिलाओं की गरिमा की लड़ाई दिखाना कितना जरूरी, ये मैंने सीखा।" 90 के दशक का अंत उनके लिए जादुई रहा, जब दर्शकों ने उनकी दिशा तय की थी।
2000 के दशक में 'साथिया' ने करियर को नया मोड़ दिया। रानी ने कहा, "यहां मैंने दोषपूर्ण, भावुक और असली महिला का किरदार निभाया है। परफेक्ट बनने की बजाय ईमानदार एक्टिंग की चाह रखी, जो 'हम तुम' जैसी फिल्मों तक ले गई।" फिर आया 'ब्लैक', जहां संजय लीला भंसाली और अमिताभ बच्चन के साथ काम ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। "ये अनुशासन, समर्पण और साहस का सबक था। मौन भाव भी शब्दों से ज्यादा बोल सकता है, ये मैंने जाना।" फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में उन्होंने लगातार तीन साल बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब जीता।
अपने 30 साल के सफर पर रानी ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए बेहद भावुक रही है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना लंबा सफर तय करूंगी। यह सब दर्शकों के प्यार और मेरे परिवार के सहयोग की वजह से संभव हुआ।”
रानी को हमेशा समाज को ललकारने वाली महिलाओं ने लुभाया 'बंटी और बबली', 'नो वन किल्ड जेसिका', खासकर 'मर्दानी' सीरीज ने दर्शकों को खींचा। "शिवानी शिवाजी रॉय शांति से ताकत दिखाती है, कठिन कहानियां प्रभावशाली होती हैं।" एक्ट्रेस शादी और बेटी अदीरा के बाद भी नहीं रुकीं। "हिचकी' और 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' ने भावनात्मक गहराई सिखाई। इस फिल्म ने उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया, जिसे उन्होंने हर मां को समर्पित किया।" रानी का ये सफर साबित करता है कि जुनून और सच्चाई से करियर लंबा चलता है। जल्द 'मर्दानी 3' में वापसी करने वाली हैं।