फिल्म-रिटर्न ऑफ जंगल
फिल्म-रिटर्न ऑफ जंगल
निर्देशक-वैभव कुमारेश
जॉनर- एमनिमेशन
रेटिंग-3.5/5
Return Of The Jungle: इस सप्ताह बॉक्स ऑफिस पर एनिमेशन फ़िल्म रिटर्न ऑफ जंगल रिलीज हुई है। आज जब बच्चों के लिए बनने वाली ज्यादातर एनिमेशन फिल्में विदेशी कल्पनाओं, सुपरहीरो और जादुई दुनियाओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं, ऐसे समय में ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ एक सुखद बदलाव की तरह सामने आती है। मशहूर एनिमेटर वैभव कुमारेश द्वारा निर्देशित यह फिल्म भारतीय लोककथाओं, दादा-दादी की कहानियों और आज के बच्चों की रोजमर्रा की समस्याओं को एक साथ पिरोने की कोशिश करती है। यह कोई बहुत बड़ी या क्रांतिकारी कहानी नहीं सुनाती, लेकिन अपने सरल और दिल को छू लेने वाले अंदाज से परिवार के साथ देखने लायक अनुभव जरूर बन जाती है।
फिल्म की कहानी कहानी
फिल्म का केंद्र है मिहिर और उसके स्कूल के दोस्त, जो स्कूल के एक दबंग और शरारती लड़के से परेशान हैं। डर और असहायता के बीच वे अपने दादा, के पास पहुंचते हैं। दादा बच्चों को सीधे समाधान देने के बजाय उन्हें जंगल की रोचक कहानियां सुनाते हैं। इन कहानियों में पंचतंत्र की झलक दिखाई देती है, जहां जानवरों और जंगल के किरदारों के माध्यम से दोस्ती, साहस, समझदारी और सहानुभूति जैसे मूल्यों की सीख दी जाती है। धीरे-धीरे बच्चे इन कहानियों के संदेश को अपनी जिंदगी में लागू करना सीखते हैं और अपनी समस्याओं का रास्ता खुद खोज लेते हैं। फिल्म का यही हिस्सा इसे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीख से भरपूर पारिवारिक फिल्म बनाता है।
निर्देशन और एनीमेशन
वैभव कुमारेश की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से उनकी सरल लेकिन प्रभावी कहानी कहने की शैली रही है और यहां भी वह नजर आती है। फिल्म का एनीमेशन रंगों से भरपूर और जीवंत है। जंगल की दुनिया बेहद आकर्षक दिखाई देती है, जहां हर पेड़, हर जानवर और हर दृश्य में एक अलग ऊर्जा महसूस होती है। किरदारों की डिजाइनिंग भी शानदार है। मुख्य पात्रों के साथ-साथ छोटे-छोटे सहायक किरदार भी अपनी अलग पहचान छोड़ते हैं। बच्चों के लिए यह दुनिया रोमांचक लगती है, जबकि बड़े दर्शकों को इसमें अपने बचपन की कहानियों की झलक दिखाई देती है।
वर्डिक्ट
फिल्म की सबसे खास बात इसकी भारतीय आत्मा है। ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है। पंचतंत्र से प्रेरित कहानियां और दादा द्वारा बच्चों को सुनाई जाने वाली सीख दर्शकों को उन दिनों की याद दिलाती हैं, जब रात में सोने से पहले कहानियां सुनना परिवार की परंपरा हुआ करती थी।
फिल्म में मौजूद यह भावनात्मक जुड़ाव इसे सिर्फ बच्चों की फिल्म नहीं रहने देता, बल्कि माता-पिता और दादा-दादी के लिए भी एक खास अनुभव बना देता है। भजन और लोकधुनों से प्रेरित गाने फिल्म के माहौल को एंटरटेनिंग बनाते हैं। कई गाने सुनने में अच्छे लगते हैं और बच्चों को पसंद भी आएंगे।
‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ ऐसी फिल्म है जो बड़े दावों या चौंकाने वाले ट्विस्ट के सहारे नहीं चलती। फ़िल्म की सादगी, भारतीय संस्कृति से जुड़ाव और सकारात्मक संदेश इस फ़िल्म को ख़ास बनाते है। रंगीन एनीमेशन, पंचतंत्र से प्रेरित सीख, भावनात्मक गर्माहट और मनोरंजन का संतुलन इसे बच्चों और परिवारों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है। यह फिल्म याद दिलाती है कि अच्छी कहानियां हमेशा बड़े विजुअल इफेक्ट्स से नहीं, बल्कि दिल से निकले भावों से बनती हैं।
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