Aakhiri Sawal Review: संजय दत्त स्टारर 'आखिरी सवाल' ने सिनेमाघरों में दी दस्तक, इन सवालों के मिले जवाब

Aakhiri Sawal Review: संजय दत्त, समीरा रेड्डी स्टारर 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं। आरएसएस पर बेस्ड इस फिल्म को अगर आप देखने का प्लान कर रहे हैं, तो एक बार इस रिव्यू को पढ़ लीजिए।

अपडेटेड May 15, 2026 पर 1:34 PM
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आखिरी सवाल फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं। फिल्म में संजय दत्त, नमाशी चक्रवर्ती, समीरा रेड्डी, अमित साध, नीतू चन्द्रा श्रीवास्तव , पूजा त्रिधा चौधरी, मृणाल कुलकर्णी नजर आए हैं।

फिल्म- 'आखिरी सवाल'

कलाकार- संजय दत्त, नमाशी चक्रवर्ती, समीरा रेड्डी, अमित साध, नीतू चन्द्रा श्रीवास्तव , पूजा त्रिधा चौधरी, मृणाल कुलकर्णी 

निर्देशक- अभिजीत मोहन वारंग


रेटिंग-3.5

Aakhiri Sawal Review: संजय दत्त स्टारर फिल्म 'आखिरी सवाल' रिलीज हो गई है। फिल्म कैसी है? चलिए आपको बताते हैं। फिल्म का पहला सीन केरल राज्य की राजनीतिक हिंसा से शुरू होता है। कुछ राजनीतिक गुंडे एक व्यक्ति को मिलकर मार देते हैं। अखबारों में यह खबर अगले दिन प्रकाशित होती है।

फिल्म की कहानी

विक्की (नमाशी चक्रवर्ती) कॉलेज में अपने प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) से अपनी डॉक्टरेट की थीसिस रोकने के लिए बहस करते हैं। प्रोफेसर आरएसएस के तीन सिद्धांत 'व्यक्ति निर्माण, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण' के मुख्य बिंदु बताते हैं। बहस के इस सीन में विक्की प्रोफेसर पर इल्ज़ाम लगाता है कि वह थीसिस रोककर आरएसएस को बचाना चाहते हैं। इस सीन के अंत में प्रोफ़ेसर विक्की को थप्पड़ मारते हैं, जिसे प्रोफ़ेसर पल्लवी मेनन (समीरा रेड्डी) मोबाइल से रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर वायरल कर देती हैं।

विवाद बढ़ने पर विक्की प्रोफेसर को 5 सवालों के जवाब देने का चैलेंज देता है कि अगर प्रोफेसर इसका उत्तर दे देंगे तो वह थीसिस वापस ले लेगा। विक्की की दोस्त सारा (त्रिधा चौधरी) उसे समझाती है कि इस मुद्दे के ज़रिए उसका इस्तेमाल किया जा रहा है। कॉलेज के हॉल में विक्की पहला सवाल पूछता है, 'क्यों आरएसएस को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए सरकार द्वारा तीन बार बैन लगाया गया?' इसका जवाब जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।

फिल्म में राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों को भी बखूबी ढंग से दिखाया गया है। फिल्म में न्यूज़ चैनल एंकर आदित्य (अमित साध) इस डिबेट से पहले प्रोफ़ेसर गोपाल नाडकर्णी से मिलते हैं। प्रोफेसर नाडकर्णी की पत्नी प्रभा (मृणाल कुलकर्णी) अपने पति को इस डिबेट के लिए तैयार करती हैं। आगे की डिबेट में न्यूज़ चैनल की शो डायरेक्टर काव्या रावत (नीतू चंद्रा) खासा रुचि लेती हैं।

कहानी की शुरुआत एक अकादमिक विवाद से होती है, जिसे एक सनसनीखेज न्यूज़ एंकर और एक महत्वाकांक्षी राजनीतिक कार्यकर्ता मिलकर राष्ट्रीय बहस में बदल देते हैं। इसमें आरएसएस विचारधारा समर्थक प्रोफेसर नाडकर्णी, आरएसएस विरोधी विक्की और कुछ षड्यंत्रकारी तत्वों का बहुत कुछ दांव पर लगा है।

परफ़ॉर्मेंस

प्रोफ़ेसर गोपाली के किरदार में संजय दत्त का अभिनय बहुत संजीदा है। उन्होंने एक संस्था का पक्ष रखते हुए नाटकीयता और अभिनय में बेहतरीन संतुलन रखा है। उनकी संवाद अदायगी भी बहुत प्रभावशाली है। विक्की हेडगे के किरदार में नमाशी चक्रवर्ती अशांति और सवालों के साथ बहुत जबरदस्त परफ़ॉर्मेंस प्रस्तुत करते हैं। इस फ़िल्म में उनका अब तक का सबसे बेहतरीन अभिनय देखा जा सकता है। न्यूज़ एंकर के किरदार में अमित साध भी असरदार रहे हैं। वह एक डिबेट शो को बेहद इंट्रेस्टिंग बनाते हैं। न्यूज़ चैनल शो की प्रधान संपादक के किरदार में नीतू चंद्रा ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। प्रोफेसर पल्लवी के किरदार में समीरा रेड्डी नेगेटिव शेड्स में सबको चौंकाती हैं।सभी कलाकारों ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है।

डायरेक्शन

निर्देशन अच्छा है। निर्देशक ने इतने संवेदनशील और विवादित विषय को कॉन्फिडेंस के साथ निर्देशित किया है। एक डिबेट शो और एक संस्था के सिद्धांतों पर सवाल उठाती इस फ़िल्म का निर्देशन अभिजीत मोहन वारंग ने किया है। उन्होंने फ़िल्म में सत्य और ड्रामा के बीच संतुलन बनाया है, साथ ही तथ्यों को बहुत ही वास्तविक तरीके से पेश किया है। फिल्म के पहले हिस्से में एक छात्र और प्रोफ़ेसर के बीच विचारों और विश्वास के टकराव के ड्रामा शानदार है। फ़िल्म के डायलॉग दमदार हैं। कहानी और किरदारों के दोनों पक्षों को निर्देशक समान अवसर देते हैं, इसलिए यह डिबेट एकपक्षीय नहीं लगती।

फिल्म देखें या नहीं

पहली बात अगर आप आरएसएस को पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपके लिए हैं। दूसरा अगर आप आरएसएस के बारे में जानना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए। आखिरी सवाल एक साहसिक और दमदार फ़िल्म है, जो देश के सबसे विवादित और संवेदनशील सवालों को बड़े प्रभावशाली तरीके से उठाती है। फ़िल्म एक ऐसे संस्थान की बात करती है, जिसे जानबूझकर कुछ लोग बदनाम करना चाहते हैं। यह फ़िल्म बहुत ही ईमानदारी और तथ्यपरक तरीके से आरएसएस के कार्य और इतिहास को सामने लाती है। फ़िल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि क्या बाबरी मस्जिद विध्वंस और महात्मा गांधी की हत्या के पीछे आरएसएस का हाथ था। जिस तरह से फ़िल्म अपने तथ्यों, तर्कों और घटनाओं को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करती है, वह बेहद प्रभावशाली और चौंकाने वाला है।

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