Cinema Ka Flashback: इतनी ही शर्म आती है तो बुर्का पहनकर घर क्यों नहीं बैठ जाती....

Cinema Ka Flashback: शम्मी कपूर के साथ 'जंगली' सायरा बानो की पहली फिल्म थी। इस फिल्म के हिट होते ही एक्ट्रेस हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार बन गई थीं। हाल में वेटरन एक्ट्रेस ने इस मूवी को लेकर सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट किया है।

अपडेटेड Nov 01, 2025 पर 1:57 PM
इतनी ही शर्म आती है तो बुर्का पहनकर घर क्यों नहीं बैठ जाती....

Cinema Ka Flashback: चाहे कोई मुझे जंगली कहे...कहने को कहता रहे....। ये गाना आज भी हर किसी की जुबान पर चढ़ा रहता है। फिल्म जंगली के इस गाने को शम्मी कपूर के ऊपर फिल्माया गया था। फिल्म में सायरा बानो भी नजर आई थीं। एक्ट्रेस की यह पहली फिल्म थी। सीधी, सहमी सी सायरा को इस फिल्म के सेट पर शम्मी कपूर से खूब जोर से डांट पड़ी थी....

साल 1961 में आई फिल्म जंगली ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ दिए थे। सायरा बानो ने साल 2023 में जंगली फिल्म के इस किस्से का जिक्र किया था। उन्होंने शूट से लेकर शम्मी कपूर के कामकाज तक सब पर खुलकर बात की थी। ये पहला मौका था जब सायरा बानो फिल्मी दुनिया में एंट्री करने जा रही थीं। चारों तरफ भीड़ और बड़े बड़े लोगों को देख वह काफी नर्वस हो गई थीं। तब उनकी उम्र करीब 16 साल की रही होगी।

सायरा बानो ने कहा कि एक सीन था जहां शम्मी जी को उनपर खूब तेज से गुस्सा होना होता है। वह अपने जूते उठाते हैं और गाना गा रहे होते हैं। मगर वह ठीक से उस सीन को कर नहीं पा रही थीं। इसके बाद वह रोने लगती हैं। तभी उनकी मां आती हैं और उन्हें चुप कराती हैं। वह बेटी से कहती हैं, ‘बेटी मैंने हमेशा तुमको मना किया है कि तुमसे एक्टिंग वगरह नहीं होगी। अभी भी कोई दिक्कत नहीं हैं चलो घर चलते हैं।’

जब शम्मी कपूर ने ये बाते सुनी तभी सायरा बानो के अप्पाजी को आंख मारी इशारों में समझाया और एक्ट्रेस को तेजी से डांटना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, ‘ये सब क्या है...अगर तुम्हें शर्म आ रही है या इस तरह काम नहीं करना है तो तुम घर पर बुर्का पहनकर रहो। शम्मी कपूर की डांट सुनकर वह और तेज रोने लगी थीं। गुस्से में उन्हें पलटकर कहा कि अब तो वह ये सीन सबको करके ही दिखा देंगी। ऐसे फिल्म की शूटिंग पूरी हुई और फिल्म हिट रही।

हाल में एक बार फिर से सायरा बानो ने अपने इंस्टाग्राम पर जंगली को लेकर एक लंबी चौड़ीं पोस्ट शेयर की है। अभिनेत्री ने लिखा, "चौंसठ साल पहले, एक युवा, बड़ी आंखों वाली लड़की पहली बार कैमरे के सामने खड़ी थी, अनिश्चित, घबराई हुई, और उत्साह और भय से कांप रही थी। वह लड़की मैं थी।


सायरा बानो ने कहा, "लंदन से लौटने पर मुझे ए.वी.एम. और जेमिनी जैसे प्रतिष्ठित स्टूडियो से फिल्मों के प्रस्ताव मिले, और जिन फिल्म निर्माताओं की मैं बहुत प्रशंसा करती हूं, उनमें कमाल अमरोही, रामानंद सागर, बी.आर. चोपड़ा और फिल्मालय के प्रिय एस. मुखर्जी अंकल शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को साधना और आशा पारेख जैसे चमकदार सितारे दिए।

अभिनेत्री ने लिखा, "शुरू में वह मुझे सुनील दत्त साहब के साथ 'हम हिंदुस्तानी' में कास्ट करना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। उनके भाई, सुबोध मुखर्जी अंकल, 'जंगली' नाम से एक नई फ़िल्म की तैयारी कर रहे थे, एक ऐसी कहानी जिसके लिए एक शरारती, ज़िंदादिल लड़की की ज़रूरत थी... और शायद, मैं वैसी ही थी! टॉमबॉय और एकांतप्रिय का एक अनोखा मिश्रण, जो एक पल नंगे पांव पेड़ों पर चढ़ती और अगले ही पल पर्दे के पीछे शरमाकर छिप जाती।"

जब 1961 में 'जंगली' सिल्वर स्क्रीन पर आई, तो इसने न सिर्फ़ दर्शकों का मनोरंजन कियाबल्कि इसने हिंदी सिनेमा के रोमांस, संगीत और शैली के प्रति नज़रिए को भी नई परिभाषा दी। सुबोध मुखर्जी द्वारा निर्देशित और जोशीली सायरा बानो और आकर्षक शम्मी कपूर अभिनीत, 'जंगली' एक सांस्कृतिक मील का पत्थर बन गई-"याहू!"

फिल्मालय स्टूडियोज़ के बैनर तले रिलीज़ हुई, जंगली ने 1950 के दशक की गंभीर, सामाजिक रूप से जागरूक फिल्मों से हटकर, कहानी कहने के एक अधिक युवा, ऊर्जावान और आधुनिक रूप की ओर एक बदलाव का प्रतीक प्रस्तुत किया। फिल्म का कथानक सरल होते हुए भी बेहद आकर्षक थायह शेखर (शम्मी कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक धनी परिवार का सख्त, भावनात्मक रूप से दबा हुआ उत्तराधिकारी है, और राजकुमारी (सायरा बानो), हँसी और प्रेम को अपनाना सिखाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।